देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी चंदन जीना पर ईडी की कार्रवाई के बाद सियासी पारा गरम है। इस पूरे मामले में अब हरीश रावत ने मोर्चा खोलते हुए राज्य सरकार को अपने तीन साल के कार्यकाल की जांच कराने की खुली चुनौती दी है।
पूर्व सीएम ने सोमवार को सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए जो भी सरकारी नियुक्तियां हुई हैं, सरकार चाहे तो आयोग गठित कर उसकी जांच करा सकती है। अगर जांच में कहीं भी पद के दुरुपयोग का मामला सामने आता है तो कार्रवाई के लिए वह तैयार हैं।
रावत ने अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा भी पेश किया। उन्होंने कहा कि उनके तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गईं, जबकि 18 हजार पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन भेजा गया था।
उन्होंने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर अपनी गलती स्वीकार की। रावत ने कहा कि अध्यक्ष पद पर जिस व्यक्ति की नियुक्ति की गई, वह उस पद की गरिमा को बनाए नहीं रख पाया। यह उनकी चूक थी, जिसके लिए वह पहले भी माफी मांग चुके हैं और आज फिर क्षमा मांगते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा उनके खिलाफ सुनियोजित कैंपेन चलाया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें सोशल मीडिया पर आकर अपनी बात रखनी पड़ी।
अपने पूर्व ओएसडी चंदन जीना का बचाव करते हुए रावत ने कहा कि जीना वर्ष 1991 से उनके साथ जुड़े हुए हैं और हमेशा निष्ठा के साथ काम किया है। उनकी मेहनत की कमाई को हरीश रावत का पैसा बताकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। रावत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी किसी पद या काम के बदले पैसे नहीं लिए हैं और उनका सार्वजनिक जीवन सभी के सामने खुली किताब की तरह है।













