नेपाल के गोरखा जिले से इंसानियत की ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सबका दिल जीत लिया। बूढ़ी गंडकी नदी के बीच एक छोटे से पत्थर पर 20 दिनों तक फंसे एक बेजुबान कुत्ते को आखिरकार नई जिंदगी मिल गई।
इस कुत्ते का नाम है सेती। वह धारचे ग्रामीण नगरपालिका के दयाराम कार्की का पालतू कुत्ता है। 11 अक्टूबर को नदी में अचानक आई बाढ़ में सेती बह गया था। परिवार ने उसे ढूंढने की बहुत कोशिश की लेकिन कोई पता नहीं चला। सबने सोचा कि वह अब नहीं रहा।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सेती बहते हुए चुमानुबरी और धारचे की सीमा के पास जगत बगर में एक खड़ी चट्टान के नीचे फंस गया। चारों तरफ तेज बहाव और ऊपर पहाड़। न निकलने की जगह, न खाने का सहारा।
पिछले बुधवार को स्थानीय लोगों ने उसे चट्टान पर बैठे देखा। खबर पूरे गांव में फैल गई। लोग रोज नदी के दूसरे किनारे से उस तक बिस्कुट और खाना फेंक कर उसे जिंदा रखते रहे। प्रशासन और पशु कल्याण संगठनों ने हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट करने की भी कोशिश की, लेकिन तेज हवाओं और संकरी जगह के कारण कामयाब नहीं हो पाए।
आखिर शुक्रवार शाम दो कयाकर्स देवता बनकर आए। जान की परवाह किए बिना उन्होंने उफनती नदी में अपनी पीली नाव उतारी। तेज धारा और बारिश के बीच वह चट्टान तक पहुंचे और सेती को सुरक्षित अपनी गोद में उठा लिया।
20 दिन बाद जब सेती अपने मालिक से मिला तो आंखों में आंसू थे। भूखा-प्यासा और कमजोर हो चुका सेती अब खतरे से बाहर है। डॉक्टर उसकी देखभाल कर रहे हैं।
ये कहानी सिर्फ एक कुत्ते के रेस्क्यू की नहीं है, ये बताती है कि अगर कोशिश सच्चे दिल से हो तो एक बेजुबान की भी जिंदगी बचाई जा सकती है।










