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खेल जगत : एडवोकेट कुलदीप की धमाकेदार पारी से ऋषिकेश की जीत

ऋषिकेश बार एसोसिएशन के सम्मानित अधिवक्ता भाई कुलदीप रावत द्वारा देहरादून में ऋषिकेश बार एसोसिएशन की तरफ से खेलते हुए 40 रन का महत्वपूर्ण योगदान दिया। और ऋषिकेश बार एसोसिएशन की टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया भाई कुलदीप रावत आप...

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चमोली में बड़ा हादसा: पीपलकोटी सुरंग में पानी-मलबा घुसा, 6 मजदूरों की मौत

चमोली में बड़ा हादसा: पीपलकोटी सुरंग में पानी-मलबा घुसा, 6 मजदूरों की मौत

  चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी यानी मयापुर क्षेत्र में बनी टीएचडीसी की जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग...

सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

सरकार बहादुर पार्ट 3 : सरकार को नहीं सरोकार, उत्तराखंड की मुस्लिम बेटी नहीं जा पाई करियर बनाने के लिए

देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा...

तमक नाला हादसा  : लापता शख्स की तलाश तीसरे दिन भी जारी, रेस्क्यू में जुटीं 6 एजेंसियां

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  जोशीमठ। ज्योतिर्मठ-मलारी मार्ग पर तमक नाला में तेज बहाव की वजह से वैली ब्रिज के बहने की घटना के...

सरकार बहादुर पार्ट 2 : मुख्यमंत्री की नई कोचिंग योजना में रोजगार, जमीन पर बेरोजगारी” बेरोजगार बोले – “कोचिंग से पेट नहीं भरता, नौकरी दो”

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  देहरादून। सरकार ने एक बार फिर बेरोजगार युवाओं को "सपने" बेचने का काम किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी...

सराहनीय : देश के जवानों ने किया रक्तदान, ट SSB ने मनाया हर घर तिरंगा अभियान

सराहनीय : देश के जवानों ने किया रक्तदान, ट SSB ने मनाया हर घर तिरंगा अभियान

  अल्मोड़ा। स्वतंत्रता दिवस 2026 को खास बनाने के लिए क्षेत्रक मुख्यालय सशस्त्र सीमा बल अल्मोड़ा में "हर घर तिरंगा...

गजब का उत्तराखंड परिवहन निगम : बस एक जांच दो और दो कहानी, प्रवर्तन दल पर रिश्वत के आरोप

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  देहरादून। उत्तराखंड परिवहन निगम की बे टिकट (बिना किराए की सवारी) रोकने की कवायद उस वक्त सवालों में आ...

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