देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में शनिवार को भूचाल आ गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के एक कथित बयान ने पूरे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को सड़क पर उतार दिया। आरोप है कि उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों को लेकर “साला घर में बैठे-बैठे बेरोजगारी का रोना रो रहे हैं” जैसे शब्द कहे।
उन्होंने कथित तौर पर बेरोजगारों को लेकर ‘साला’ शब्द का प्रयोग किया है, जिसको लेकर बेरोजगार संगठन में खासा नाराजगी है।
एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ये मामला और गरमा गया। इस क्लिप में महेंद्र भट्ट की आवाज बताई जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बयान के सामने आते ही बेरोजगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने कहा, “ये कोई जुबान की फिसलन नहीं है, ये भाजपा की मानसिकता है। जो युवा पेपर लीक, भर्ती घोटालों और लटकी भर्तियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उन्हें इस तरह अपमानित किया जा रहा है।”
राम कंडवाल ने आगे कहा, “महेंद्र भट्ट जी को शायद पता नहीं कि आज उत्तराखंड का हर दूसरा घर बेरोजगारी से जूझ रहा है। आपके परिवार के लोग सरकारी पदों पर होंगे, इसलिए आपको दर्द महसूस नहीं होगा। लेकिन जिनके घरों में चूल्हा नहीं जल रहा, उनसे पूछिए। 24 घंटे में सार्वजनिक माफी नहीं मांगी तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।”
इस बयान के बाद देहरादून, हल्द्वानी, ऋषिकेश और कोटद्वार में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने महेंद्र भट्ट का पुतला फूंका और “महेंद्र भट्ट होश में आओ, बेरोजगारों का अपमान बंद करो” के नारे लगाए।
सोशल मीडिया पर भी #MahendraBhattMaafiMango और #BerojgarKaApmaan टॉप ट्रेंड में रहे। अभिभावकों और शिक्षकों ने भी इस बयान की निंदा की।
ऑडियो/वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा कार्यालय में देर तक बैठक चली। पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुटी है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बना लिया है। उनका कहना है कि “ये भाजपा की असलियत है। चुनाव के समय युवा याद आते हैं और सत्ता में आने के बाद गाली मिलती है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले ये बयान भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। उत्तराखंड में युवा वोट निर्णायक है और इस एक शब्द ने पूरे वोट बैंक को नाराज कर दिया है।
फिलहाल बेरोजगार संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक माफी नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा। उत्तराखंड आज सवाल पूछ रहा है – क्या यही है युवाओं के प्रति सत्ता का सम्मान?








