उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी और संघ की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे ने सत्ता दल की चिंता बढ़ा दी है। सर्वे में राज्य की 47 सीटों में से 32 विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी सामने आई है। इसके चलते इन सीटों पर मौजूदा विधायकों का टिकट कट सकता है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नहीं चाहती कि विधायकों के खिलाफ नाराजगी उसकी जीत की हैट्रिक की संभावनाओं पर असर डाले। ऐसे में नेतृत्व इन सीटों पर नया चेहरा उतारकर सत्ता विरोधी लहर की धार को कुंद करना चाहता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों का गुस्सा सरकार के खिलाफ कम और विधायकों के खिलाफ ज्यादा है। लोग मानते हैं कि भाजपा के दस साल के शासन में विकास के कई कार्य हुए हैं। हालांकि इस दौरान स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक लापरवाही और युवाओं की नाराजगी का स्वर भी मजबूत हुआ है। पार्टी इसे जल्द दुरुस्त करने की पहल करेगी।
संघ सूत्रों के अनुसार बीते दो महीने में राज्य की सभी 70 सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, महत्वपूर्ण हस्तियों और आम लोगों से संपर्क कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है।
रिपोर्ट में सबसे अहम बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर सामने आई है। नेतृत्व उनके लिए नई और सुरक्षित सीट की व्यवस्था पर भी मंथन कर रहा है। पार्टी चाहती है कि सीएम को ऐसी सीट मिले जहां से वह चुनाव के दौरान पूरे राज्य में तनावमुक्त होकर प्रचार कर सकें। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में धामी खटीमा से हार गए थे, जिसके बाद उन्होंने उपचुनाव में चंपावत सीट से जीत दर्ज की थी।
सूत्रों का कहना है कि राज्य में विपक्ष के मजबूत या कमजोर होने का चुनाव परिणामों पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। मुख्य मुद्दा स्थानीय स्तर की नाराजगी है। उदाहरण के तौर पर दिवंगत भुवन चंद्र खंडूरी के समय कांग्रेस बेहद कमजोर थी, फिर भी विधायकों और उम्मीदवारों के खिलाफ लोगों की नाराजगी के कारण भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीते चुनाव में हारी हुई 23 सीटों में से 10 सीटों पर पार्टी की स्थिति बेहतर होने की संभावना है।
अब पार्टी नेतृत्व सर्वे के आधार पर उन्हीं सीटों पर नए चेहरे उतारने की तैयारी में है जहां विधायकों के खिलाफ गुस्सा सबसे ज्यादा है।








