देहरादून। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के परिवार को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। हरीश रावत ने खुलकर इच्छा जताई है कि उनके छोटे बेटे आनंद रावत इस बार चुनावी मैदान में उतरें।
हरीश रावत ने पार्टी नेतृत्व को साफ संकेत दिया है कि जिस सीट पर कांग्रेस लंबे समय से नहीं जीत पाई है और जहां कोई मजबूत दावेदार नहीं है, वहां आनंद को मौका दिया जा सकता है।
हरदा के मुताबिक, आनंद रावत ने खुद ऐसी ही एक चुनौतीपूर्ण सीट चुनी है, जहां कांग्रेस 1984 के बाद से यानी पिछले 40 सालों से जीत दर्ज नहीं कर पाई है।
बोले- हक मारकर टिकट नहीं चाहिए, उत्तराखंडियत की सोच आगे बढ़ाए बेटा
टिकट मांगने के साथ ही हरीश रावत ने बेहद संतुलित बयान भी दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि उनकी “उत्तराखंडियत” की सोच को उनका बेटा आगे बढ़ाए, लेकिन किसी हकदार का हक मारकर आनंद को टिकट नहीं मिलना चाहिए।
हरीश रावत ने इस दौरान अपनी बेटी अनुपमा रावत का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अनुपमा ने भी हरिद्वार ग्रामीण जैसी सीट चुनी थी, जहां कांग्रेस लंबे समय से नहीं जीत पा रही थी। पिछली बार वहां से वह चुनाव हारीं, लेकिन आज भी अपने क्षेत्र में डटी हुई हैं और लगातार काम कर रही हैं।
हरदा के इस बयान के बाद अब निगाहें कांग्रेस हाईकमान पर हैं कि क्या वह 40 साल के सूखे को खत्म करने के लिए आनंद रावत पर दांव लगाएगा या नहीं।







