देहरादून। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद अब सियासी और कानूनी दोनों मोर्चों पर तेज हो गया है। एक तरफ जहां पुलिस की स्पेशल टीम ने जांच तेज कर दी है, वहीं सरकार में ही उनके साथी मंत्री खजान दास ने इस पूरे प्रकरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
दरअसल सोमवार को उत्तराखंड के नवनियुक्त राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में मंत्री रेखा आर्या शामिल नहीं हुईं। बताया जा रहा है कि उनका कार्यक्रम पहले से तय था, लेकिन आखिरी मौके पर उन्होंने दूरी बना ली। माना जा रहा है कि पति के साथ चल रहे विवाद के कारण ही वह समारोह में नहीं पहुंचीं। इसी को लेकर जब समाज कल्याण मंत्री खजान दास से सवाल किया गया तो उन्होंने खुलकर प्रतिक्रिया दी। खजान दास ने कहा कि जो हो रहा है वह ठीक नहीं है, ऐसा नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब रेखा आर्या के साथ कथित उत्पीड़न और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल जैसी बातें सामने आ रही हैं, जो पहले कभी नहीं आई थीं। अब तो दोनों के बच्चे भी बड़े हो गए हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए थीं। एससी-एसटी उत्पीड़न से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस बारे में कानून ही बेहतर बता सकता है, लेकिन उनके हिसाब से जो कुछ भी हो रहा है वह सही नहीं है।
दूसरी तरफ इस केस की जांच कर रही एसआईटी ने कार्रवाई तेज कर दी। विवेचक सीओ अनुज कुमार खुद नेहरू कॉलोनी स्थित मंत्री के सरकारी आवास पर पहुंचे और उनके बयान दर्ज किए। इस दौरान एसआईटी ने मुकदमे में लगाए गए सभी गंभीर आरोपों से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली, जिसमें कंपनियों के दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर कर हेराफेरी करने और पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी करने के आरोप भी शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी बिंदुओं पर मंत्री से विस्तार से पूछताछ की है। साथ ही मामले से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी कब्जे में ले लिया गया है, जिसे अब जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा जाएगा। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही ऑडियो की सच्चाई सामने आएगी। गौरतलब है कि कैबिनेट मंत्री ने 15 अक्टूबर को कैंट कोतवाली में पति गिरधारी लाल के खिलाफ मारपीट करने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और एक महिला से बातचीत के दौरान हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।









