देहरादून। अब सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया पर अनर्गल टिप्पणियां करने वाले अध्यापकों और कर्मचारियों पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी ने इस संबंध में महत्वपूर्ण / शीर्ष वरीयता पत्र जारी किया है।
निदेशक कार्यालय ननूरखेड़ा देहरादून से जारी पत्रांक सेवा.अराज./ तीन(ग)77/10244-46/विविध निर्देश/2026-27 दिनांक 24 अक्टूबर 2026 के अनुसार गढ़वाल मंडल पौड़ी और कुमाऊं मंडल नैनीताल के अपर निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं। विषय है – अध्यापकों/कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया/प्रिंट मीडिया पर अनर्गल टिप्पणियां प्रसारित न किये जाने विषयक।
पत्र में कहा गया है कि संज्ञान में आया है कि कतिपय अध्यापकों/कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया/प्रिंट मीडिया पर अनर्गल टिप्पणियां प्रसारित की जा रही हैं, यह कृत्य कदापि क्षम्य योग्य नहीं है। इस प्रकार के कृत्य से विभाग एवं राज्य की छवि धूमिल हो रही है और यह उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली 2002 के नियम 3(1), नियम 3(2) एवं नियम 7 के विपरीत होने के साथ-साथ शिक्षक/कार्मिक की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
निदेशक ने याद दिलाया है कि निदेशालय के पूर्व पत्रांक सेवा.अराज./तीन(ग)77/24477-78/विविध निर्देश/2024-25 दिनांक 23-02-2026 के द्वारा पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि यदि किसी अध्यापक/कर्मचारी द्वारा सोशल मीडिया पर किसी प्रकार की अनर्गल टिप्पणी की जाती है तो ऐसे शिक्षक/कर्मचारी को चिन्हित करते हुए आचरण नियमावली 2002 के प्रावधानानुसार कार्रवाई के लिए सुस्पष्ट प्रस्ताव साक्ष्यों सहित संबंधित के नियुक्ति प्राधिकारी को उपलब्ध कराते हुए निदेशालय को भी अवगत कराएं।
अब पुनः निर्देशित किया गया है कि यदि किसी शिक्षक/कार्मिक द्वारा सोशल मीडिया/प्रिंट मीडिया व अन्य माध्यमों से अनर्गल टिप्पणियां प्रसारित की गयी हैं अथवा की जा रही हैं तो उनके विरुद्ध आचरण नियमावली 2002 के प्रावधानानुसार कार्रवाई के लिए सुस्पष्ट प्रस्ताव मंतव्य सहित संबंधित कार्मिक के नियुक्ति प्राधिकारी को उपलब्ध कराने के साथ-साथ निदेशालय को भी अवगत कराएं।
इस पत्र की प्रतिलिपि महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड और समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।











