अल्मोड़ा/देहरादून। नारा था मेरी दीदी को लखपति बनाना है। लेकिन मंत्री रेखा आर्या के महिला सशक्तिकरण विभाग में दीदी लखपति नहीं, सीधे करोड़पति बन गईं! और करोड़पति भी कोई आम दीदी नहीं, आरोप है कि करोड़ों का खेल खुद मंत्री जी के घर में ही खेला गया।
दरअसल, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ही लखपति दीदी योजना देखता है, जिसकी मुखिया हैं कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या। सरकार कहती है हमने दीदियों को आत्मनिर्भर बनाया। लेकिन अब अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी ने 210 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर पूरी योजना पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
पति ने ही खोली पोल, बंगले और प्रॉपर्टी का भी जिक्र
विधायक मनोज तिवारी का सबसे बड़ा बम यही है। उनका दावा है कि 210 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप खुद मंत्री रेखा आर्या के पति ने लगाए हैं। यानी घर की बात बाहर आई है।
आरोपों में सिर्फ नकद लेन-देन ही नहीं, बल्कि देहरादून और अन्य जगहों पर बने आलीशान बंगले और बेनामी प्रॉपर्टियों का भी जिक्र आ रहा है। सवाल उठ रहा है कि एक जनप्रतिनिधि की इतनी कम समय में इतनी संपत्ति कैसे बढ़ गई? क्या ये पैसा उसी लखपति दीदी योजना के नाम पर आया है, जो गरीब महिलाओं के लिए था?
तिवारी ने तंज कसते हुए कहा – “हम तो सोच रहे थे लखपति दीदी योजना से गांव की महिलाएं लखपति बनेंगी, पर यहां तो एक ही दीदी अपने आलीशान बंगले में बैठकर करोड़पति बन गई। अगर 210 करोड़ का हिसाब सही है तो ये उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा महिला सशक्तिकरण घोटाला है।”
मंत्री जी इस्तीफा कब देंगी?
तिवारी ने मांग की है कि जब तक बंगले, प्रॉपर्टी और 210 करोड़ के लेन-देन की निष्पक्ष जांच नहीं होती, मंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
अब गांव-गांव में महिलाएं पूछ रही हैं -दीदी,हमें तो समूह से 10 हजार का लोन लेने के लिए 10 चक्कर काटने पड़ते हैं, और यहां बंगले पर बंगले खड़े हो रहे हैं?
सरकार लखपति दीदी के फोटो वाले पोस्टर तो खूब लगाती है, पर क्या इस करोड़पति दीदी के बंगले वाले मामले की जांच का पोस्टर भी लगेगा?
बहरहाल अकूत संपत्ति को लेकर विपक्षी ने रेखा आर्य को घेर लिया है, जिससे आने वाले चुनावी माहौल में उनके प्रतिद्वंद्वियों को खास मुद्दा मिल गया है। देखना दिलचस्प होगा की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य इन मुश्किलों से कैसे निजात पाती है!










