टिहरी गढ़वाल के सुल्याधार क्षेत्र में एक बार फिर भालू के हमले ने दहशत फैला दी, लेकिन इस बार एक साहसी वन दरोगा की बहादुरी ने एक ग्रामीण की जान बचा ली।
बीते 21 मार्च को नकोट गांव की लक्ष्मी देवी (24), पत्नी बबलू, पर घास काटने के दौरान भालू ने जानलेवा हमला कर दिया था। साथ की महिलाओं के शोर मचाने पर भालू वहां से भाग गया, लेकिन लक्ष्मी देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनके चेहरे और आंखों पर गहरी चोटें आई हैं और उनका इलाज एम्स ऋषिकेश में चल रहा है। घटना के बाद से वन विभाग की टीम वन दरोगा अजयपाल पंवार के नेतृत्व में लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है। भालू को ट्रैंक्यूलाइज करने के लिए डॉक्टरों और वन विभाग की टीम को पिंजरे के साथ तैनात किया गया है, लेकिन अब तक भालू पकड़ में नहीं आया है।
वीरवार को अपराह्न करीब सवा 12 बजे भालू की सूचना मिलने पर वन दरोगा अजयपाल पंवार, बेरगणी गांव के प्रधान युद्धवीर सिंह, ग्रामीण विनोद रावत और वन बीट अधिकारी प्रवीन रावत सुल्याधार के थापली तोक क्षेत्र में पहुंचे। उनके साथ अन्य ग्रामीण भी मौजूद थे।
वन दरोगा के अनुसार, खाले में उनके साथ विनोद रावत आगे बढ़ रहे थे, जबकि युद्धवीर सिंह और प्रवीन रावत कुछ दूरी पर थे। तभी अचानक भालू ने विनोद रावत पर हमला कर दिया और उसके चेहरे को अपने जबड़ों में जकड़ लिया।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वन दरोगा अजयपाल पंवार ने अदम्य साहस दिखाया। उन्होंने तुरंत बरछा भालू के मुंह में घुसा दिया और डंडे से दो बार जोरदार वार किया। इससे भालू ने विनोद को छोड़ दिया और मौके से भाग गया।
करीब 15 मिनट तक चली इस भिड़ंत में विनोद रावत बुरी तरह घायल हो गए, जबकि दरोगा पंवार की कमर में भी चोट आई है। दोनों का इलाज चल रहा है। वन दरोगा के अनुसार, भालू का वजन तीन कुंतल से अधिक था और रास्ता संकरा व कठिन होने के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं।
हालांकि, उनकी बहादुरी और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया और विनोद रावत की जान बचाई जा











