देहरादून। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हरिद्वार के फेरूपुर निवासी अधिवक्ता मनोज कुमार की बेटी अवनी कश्यप, जो बीएससी बायो ग्रुप की छात्रा है, को पहले पास घोषित किया गया। वेबसाइट पर अंकतालिका भी जारी हुई और मार्कशीट डाउनलोड की गई। लेकिन बाद में वही परिणाम वेबसाइट से हटा कर संशोधित रिजल्ट जारी कर दिया गया, जिसमें छात्रा को कई विषयों में अनुत्तीर्ण दिखाया गया।
मनोज कुमार ने बेटी के परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। लेकिन सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस समय उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां मांगी जा रही थीं, उसी दौरान विश्वविद्यालय ने 25 दिसंबर 2025 को उन उत्तर पुस्तिकाओं को नीलाम कर नष्ट कर दिया।
राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि जब किसी उत्तर पुस्तिका को लेकर सूचना मांगी गई हो और मामला लंबित हो, तो अंतिम निर्णय तक उसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए। बिना विधिवत प्रक्रिया पूरी किए और तीसरे पक्ष की सहमति के बिना उत्तर पुस्तिकाओं का निस्तारण करना उचित नहीं है।
आयुक्त ने विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग और लोक सूचना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए भविष्य में सूचना अधिकार अधिनियम का पूरी गंभीरता से पालन करने की चेतावनी दी।
आयोग ने विश्वविद्यालय को आदेश दिया है कि वह छात्रा की संशोधित मार्कशीट की प्रमाणित प्रति सात दिन के भीतर उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी बताया जाए कि उत्तर पुस्तिकाओं को कब, किस आदेश के तहत और किस प्रक्रिया से नष्ट किया गया। उत्तर पुस्तिकाओं के विनष्टीकरण की तिथि और उससे संबंधित प्रमाण भी अपीलकर्ता को दिए जाएं और अनुपालन रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।








