उत्तराखंड के पहाड़ों में पलायन का सबसे बड़ा असर अब पंचायती राज व्यवस्था पर दिख रहा है। गांव खाली हो रहे हैं और चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी तक नहीं मिल रहे हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय के अनुसार पिछले उप-चुनाव में ही 11 ग्राम प्रधान के पदों पर एक भी प्रत्याशी सामने नहीं आया था। जबकि ग्राम पंचायत सदस्यों की सैकड़ों सीटें ऐसी थीं जिन पर किसी ने आवेदन तक नहीं किया था।
जून 2025 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों और फरवरी 2026 में कराए गए पहले उप-चुनाव के बावजूद हजारों पद खाली रह गए, जिसके बाद अब 12 अक्टूबर को दूसरे उप-चुनाव के लिए मतदान होना है। 14 अक्टूबर को मतगणना होगी।
पौड़ी में सबसे बुरा हाल, 1103 पद खाली
इस उप-चुनाव में कुल 23 ग्राम प्रधान, 9 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 3,890 ग्राम पंचायत सदस्यों के पद रिक्त हैं।
पलायन की मार से सबसे अधिक प्रभावित पौड़ी गढ़वाल जिला है, जहां सबसे ज्यादा पद खाली हैं।
जिलेवार कहां कितने पद खाली हैं
पौड़ी गढ़वाल: 1,103 ग्राम पंचायत सदस्य और 8 ग्राम प्रधान
अल्मोड़ा: 858 ग्राम पंचायत सदस्य और 1 क्षेत्र पंचायत सदस्य
टिहरी: 529 पंचायत सदस्य, 4 ग्राम प्रधान और 1 बीडीसी
चमोली: 279 पंचायत सदस्य, 6 ग्राम प्रधान और 1 बीडीसी
पिथौरागढ़: 284 पंचायत सदस्य और 2 ग्राम प्रधान
नैनीताल: 207 पंचायत सदस्य, 1 प्रधान और 2 क्षेत्र पंचायत सदस्य
उत्तरकाशी: 199 पंचायत सदस्य, 1 ग्राम प्रधान और 2 क्षेत्र पंचायत सदस्य
उधमसिंह नगर: 108 पंचायत सदस्य
रुद्रप्रयाग: 107 पंचायत सदस्य और 1 ग्राम प्रधान
चम्पावत: 90 पंचायत सदस्य
देहरादून: 65 पंचायत सदस्य और 1 क्षेत्र पंचायत सदस्य
बागेश्वर: 61 पंचायत सदस्य और 1 क्षेत्र पंचायत सदस्य
हरिद्वार: 14 पंचायत सदस्य और 3 ग्राम प्रधान






