अपराधों की जांच कर रही एजेंसी Enforcement Directorate (ईडी) ने उद्योगपति Anil Ambani से जुड़ी कंपनियों की करीब 581 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की हैं। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच के दौरान की गई है।
ईडी के अनुसार यह संपत्तियां Reliance Home Finance Limited (RHFL) और Reliance Commercial Finance Limited (RCFL) से जुड़ी हैं। जांच एजेंसी ने कई राज्यों में फैली जमीन और अन्य परिसंपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) किया है।
कई राज्यों में जमीन अटैच
ईडी ने 11 मार्च को जारी आदेश के तहत गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में स्थित भूखंडों और संपत्तियों को अटैच किया। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 581.65 करोड़ रुपये बताया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई Foreign Exchange Management Act (FEMA) के तहत चल रही जांच के बाद की गई। यह जांच Reliance Power Limited से जुड़े लेनदेन और विदेशी मुद्रा नियमों के संभावित उल्लंघन से संबंधित मामलों के सिलसिले में की जा रही है।
पहले भी हजारों करोड़ की संपत्तियां जब्त
ईडी इससे पहले भी अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कई संपत्तियों पर कार्रवाई कर चुकी है। बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में एजेंसी ने अलग-अलग चरणों में हजारों करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां अटैच की हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार इन मामलों में अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
जांच में यह भी सामने आया है कि समूह की कुछ कंपनियों पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और बैंक ऋण के कथित डायवर्जन के आरोप हैं। विशेष रूप से Reliance Home Finance और Reliance Commercial Finance से जुड़े लेनदेन की जांच एजेंसियां कर रही हैं।
बैंक धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन की जांच
ईडी की जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ वित्तीय लेनदेन के जरिए बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन को अन्य कंपनियों या संबंधित पक्षों तक पहुंचाया गया। एजेंसी इन मामलों में कथित मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक धोखाधड़ी के पहलुओं की भी जांच कर रही है।
फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और एजेंसी का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और संपत्तियां भी अटैच की जा सकती हैं। वहीं संबंधित कंपनियों की ओर से समय-समय पर यह कहा जाता रहा है कि वे जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रही हैं।
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