नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मी अमर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके वेतन में कटौती और पद घटाने के 2 सितंबर 2026 के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना किसी भी कर्मचारी का वेतन घटाना या डिमोशन करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामले के अनुसार अमर सिंह वर्ष 2011 से संविदा के आधार पर उत्तराखंड निवास दिल्ली में सहायक प्रोटोकॉल के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें 42,618 रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा था। शासन ने 2 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर उनका वेतन घटाकर 34,720 रुपये कर दिया और पद भी घटाकर रिसेप्शनिस्ट कर दिया। कोर्ट में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ललित सामंत ने तर्क दिया कि बिना कारण बताओ नोटिस के यह आदेश जारी किया गया। कोर्ट ने तर्क स्वीकार करते हुए आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी और सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
इसके साथ ही कर्मचारियों को उनके वास्तविक पद के अनुरूप वेतनमान देने के बजाय निम्नतर पे-लेवल पर अनुबंध कराने के मामले पर भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए रोक लगाई है।










