रिपोर्ट – हरीश चन्द्र, ऊखीमठ
रुद्रप्रयाग। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इस साल अब तक 20 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और 60 से ज्यादा शादियां भी हो चुकी हैं, लेकिन पिछले 15 से 20 साल से यहां सुलभ शौचालय और सड़क की समस्या जस की तस बनी हुई है।
त्रियुगीनारायण मंदिर समिति के मठापति परशुराम गैरोला ने बताया कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस साल अब तक 60 से अधिक जोड़े यहां विवाह बंधन में बंधे हैं। उन्होंने कहा कि गुप्तकाशी से करीब 40 किमी दूर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क बेहद खराब है। खासकर सोनप्रयाग से ऊपर मंदिर परिसर तक कच्ची और उखड़ी सड़कें हैं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कत होती है।
सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है। मठापति ने बताया कि मंदिर परिसर और आसपास के बाजारों में कहीं भी सुलभ शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इससे महिला श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और विदेशी पर्यटकों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।
मंदिर समिति ने इस समस्या के समाधान के लिए कई बार जिलाधिकारी, क्षेत्रीय विधायक और सरकार को पत्र लिखे, लेकिन हर बार सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला। परशुराम गैरोला ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत अभियान की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ देवभूमि के इस प्रमुख धार्मिक स्थल पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि धार्मिक स्थलों के विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
मठापति परशुराम गैरोला ने सभी श्रद्धालुओं से मंदिर में स्वच्छता और मर्यादा बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु पर्यावरण प्रदूषण न फैलाएं, अपने सामान और बच्चों का ध्यान रखें और भक्तिभाव से मंदिर में आएं।
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इन्हीं शिकायतों के बीच सरकार के वेडिंग डेस्टिनेशन का दावा खोखला साबित हो रहा है।








