रुद्रप्रयाग। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले रुद्रप्रयाग सीट को लेकर सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है। मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी के कामकाज को देखते हुए सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें अगले चुनाव में फिर से मौका मिलना चाहिए।
भरत सिंह चौधरी इस समय उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में केदारनाथ यात्रा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और सड़क निर्माण से जुड़े कई काम हुए हैं। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन विकास के लिए भी कई योजनाएं शुरू की गई हैं।
स्थानीय स्तर पर जनता की राय बंटी हुई है। एक पक्ष का कहना है कि मंत्री के रूप में भरत सिंह चौधरी की सरकार में मजबूत पकड़ है, जिससे जिले को विकास योजनाओं का फायदा मिला है। वहीं दूसरा पक्ष त्रियुगीनारायण मंदिर जैसी जगहों पर 15 साल से बनी सड़क और शौचालय की समस्या का हवाला देकर नाराजगी जता रहा है। वहीं जखोली विकासखंड का जाखणी-टेंडवाल मोटर मार्ग वर्षों से लंबित है, जिससे जनता में काफी नाराजगी है।
बीजेपी की रणनीति के मुताबिक 2027 में मौजूदा मंत्री और विधायक अपनी-अपनी सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। पार्टी ने साफ किया है कि खराब प्रदर्शन पर टिकट कट सकता है, लेकिन सीट नहीं बदलेगी। ऐसे में भरत सिंह चौधरी का टिकट उनके पांच साल के रिपोर्ट कार्ड पर निर्भर करेगा।
फिलहाल पार्टी ने किसी भी सीट पर उम्मीदवार तय नहीं किए हैं। अंतिम फैसला हाईकमान के सर्वे और जीत की संभावना के आधार पर होगा। रुद्रप्रयाग की जनता के बीच अब यही सवाल है कि कामकाज के दम पर फिर मौका मिले या क्षेत्र को नया चेहरा मिले।








