हरिद्वार। अपने उत्पादों को लेकर लगातार सुर्खियों में रही बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि’ फिर चर्चाओं में है।
पतंजलि फूड्स ने अपने उत्पाद न्यूट्रेला सोया चंक्स को लेकर कथित मानहानिकारक वीडियो के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने यूट्यूब चैनल ‘Trustified Certification’ पर आरोप लगाया है कि उसके द्वारा अपलोड किया गया एक वीडियो न्यूट्रेला सोया चंक्स की छवि को नुकसान पहुंचाने और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला है।
पतंजलि ने अदालत से 15.5 करोड़ रुपये का हर्जाना और वीडियो को तत्काल हटाने के लिए अंतरिम रोक (इंजंक्शन) की मांग की है।
विवादित वीडियो का शीर्षक “NUTRELA SOYA CHUNKS LAB TEST REPORT” है, जिसे 28 दिसंबर 2024 को अपलोड किया गया था। पतंजलि के अनुसार, वीडियो में दावा किया गया है कि न्यूट्रेला सोया चंक्स कुछ गुणवत्ता परीक्षणों में विफल रहा है। इसमें यह भी कहा गया है कि “सभी शाकाहारी उत्पाद फेल हो रहे हैं” और सोया चंक्स ओमेगा-3 सहित अन्य मानकों पर खरे नहीं उतरते।
कंपनी का आरोप है कि ये दावे निराधार, अपमानजनक और भ्रामक हैं, जिनका उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुमराह करना है। पतंजलि ने कहा कि इस वीडियो से न्यूट्रेला सोया चंक्स की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कंपनी ने इसे प्लांट-बेस्ड, हाई-प्रोटीन और प्राकृतिक शाकाहारी उत्पाद बताया है।
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, पतंजलि को इस वीडियो की जानकारी जनवरी 2025 में मिली थी, जिसके बाद उसने 4 मार्च 2025 को चैनल को कानूनी नोटिस भेजा। चैनल ने 10 मार्च 2025 को जवाब दिया। इसके बाद पतंजलि ने दिसंबर 2025 में मुकदमा दायर किया और दावा किया कि वीडियो के चलते उसके व्यवसाय और ब्रांड को भारी नुकसान हुआ है।
पतंजलि कम्पनी ने 10.5 करोड़ रुपये प्रतिष्ठा और परिचालन नुकसान के लिए, और 5 करोड़ रुपये ‘PATANJALI’ ट्रेडमार्क को कथित क्षति के लिए मांगे हैं।
पतंजलि ने कोर्ट को यह भी बताया कि न्यूट्रेला सोया चंक्स को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से प्रमाणन प्राप्त है और वीडियो में किए गए दावे आधिकारिक निष्कर्षों के विपरीत हैं। कंपनी ने तर्क दिया कि यदि कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया तो उसे अपूरणीय क्षति होगी, जबकि वीडियो हटाने से प्रतिवादियों को कोई नुकसान नहीं होगा।
इस मामले में अर्पित ट्रस्टिफाइड सर्टिफिकेशन, ट्रस्टिफाइड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, यूट्यूब की मालिक कंपनी गूगल एलएलसी समेत अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस शर्मिला यू. देशमुख की एकल पीठ के समक्ष हुई। प्रतिवादियों ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि यह मुकदमा कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट की धारा 12 का उल्लंघन करता है, क्योंकि अनिवार्य प्री-इंस्टीट्यूशन मेडिएशन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब नोटिस और मुकदमा दायर करने के बीच नौ महीने का अंतर है, तो तत्काल सुनवाई की क्या जरूरत है।
पतंजलि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपुर्व श्रीवास्तव ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए त्वरित अंतरिम राहत की मांग की। इस पर अदालत ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई सोमवार, 22 दिसंबर को की जाएगी। आगे की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए तय की गई है।
गौरतलब है कि न्यूट्रेला ब्रांड को पतंजलि ने 2019 में रूचि सोया के अधिग्रहण के जरिए हासिल किया था। यह ब्रांड 1979 से भारतीय घरों में मौजूद है और खुद को शाकाहारियों के लिए प्रोटीन-समृद्ध विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।







