उत्तराखंड को झकझोर देने वाले चंपावत दुष्कर्म प्रकरण में गुरुवार को नया मोड़ सामने आया। मामले में भाजपा नेता समेत तीन लोगों के नाम सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया था। अब पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट में जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आने का दावा किया गया है।
पुलिस के अनुसार छह मई को पीड़िता के परिजनों की ओर से तहरीर देकर आरोप लगाया गया था कि 5 मई की रात 16 वर्षीय नाबालिग के साथ तीन व्यक्तियों ने दुष्कर्म किया। तहरीर के आधार पर कोतवाली चंपावत में तत्काल पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चंपावत रेखा यादव के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी चंपावत की निगरानी में 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई।
पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए तथा आरएफएसएल की फील्ड यूनिट से वैज्ञानिक परीक्षण कराया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान भी दर्ज कराए गए।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता ग्राम सल्ली में आयोजित विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने एक दोस्त के साथ गई थी। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर उसकी गतिविधियों की पुष्टि की गई है।
प्रेस नोट में कहा गया है कि चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। साथ ही कुछ गवाहों के बयान तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच घटना के दिन कई बार बातचीत हुई थी, जिसे पुलिस महत्वपूर्ण संकेत मान रही है। वहीं नामजद आरोपी विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत की घटनास्थल पर मौजूदगी तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से प्रमाणित नहीं हुई है।
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच की जा रही है ताकि किसी निर्दोष को प्रताड़ित न होना पड़े और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
पुलिस ने आशंका जताई है कि कमल रावत द्वारा बदले की भावना से प्रेरित होकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर एक सुनियोजित घटनाक्रम रचा गया हो सकता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
उत्तराखंड पुलिस ने महिला और बाल अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए कहा कि झूठी और भ्रामक सूचनाओं को भी गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही मीडिया और आमजन से केवल सत्यापित तथ्यों के प्रसारण और प्रकाशन की अपील की गई है।








