गैरसैंण / भराड़ीसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में आज 27 अक्टूबर से दो दिवसीय विधानसभा सत्र का आगाज हो गया। सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विधानसभा भवन में पहुंचे, जिसके बाद स्पीकर ऋतु खंडूड़ी भूषण की अध्यक्षता में सदन की कार्यवाही शुरू हुई।
सदन के अंदर क्या हुआ?
सत्र के पहले दिन सरकार ने लगभग 7412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इसके साथ ही 8 नए विधेयकों को भी सदन में लाने की तैयारी है। सदन में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि दी गई। इस सत्र में 31 विधायकों ने सरकार से 445 सवाल पूछे हैं, जिनमें बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, सड़क, स्वास्थ्य और सबसे बड़ा मुद्दा महिला सुरक्षा शामिल है।
बाहर क्यों मचा है बवाल?
सत्र शुरू होते ही बाहर सियासी पारा चढ़ गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 14 जनहित के मुद्दों को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खासकर अंकिता भंडारी जैसे मामलों में VIP को बचाने में लगी है। कांग्रेस विधायक सदन के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
वहीं दूसरी तरफ प्रदेश प्रधान संगठन ने भी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर घेराव किया। प्रधानों का कहना है कि सरकार ने पंचायतों के अधिकार छीनकर उनके भवन निर्माण का काम दूसरी एजेंसियों को दे दिया है, जो पंचायती राज पर हमला है।
भराड़ीसैंण बना अभेद्य किला
किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने भराड़ीसैंण को पूरी तरह से किले में तब्दील कर दिया है। प्रशासन ने भराड़ीसैंण क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी है।
चमोली एसपी सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक सुरक्षा के लिए पूरे क्षेत्र को 5 सुपर जोन और 13 सेक्टरों में बांटा गया है। करीब 1500 जवान तैनात किए गए हैं, जिसमें सिविल पुलिस, PAC, ATS, डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता शामिल है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दुकमुतासैंण, दीवालीखाल, जंगलचट्टी, परवाड़ी और सारकोट मार्ग पर लोहे के बड़े गेट और कंटीले तारों की बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस कई प्रदर्शनकारियों को सिमली और जंगलचट्टी में ही रोक रही है।
गर्ल्स सेफ्टी पर आक्रोश
इस पूरे हंगामे के बीच सबसे बड़ा मुद्दा पहाड़ की बेटियों की सुरक्षा बन गया है। प्रदर्शनकारी लगातार अंकिता भंडारी केस में न्याय और प्रदेश में बढ़ते महिला अपराधों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी #JusticeForDaughters ट्रेंड कर रहा है।
फिलहाल सत्र 28 अक्टूबर तक चलेगा और हंगामेदार रहने के आसार हैं।












