देहरादून/पौड़ी। उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET) 2024 में आरक्षण लागू करने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला अब नैनीताल हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां कोर्ट ने सरकार, शिक्षा विभाग और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।
क्या है पूरा विवाद?
याचिका पौड़ी के प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र रावत और राजकीय शिक्षक संघ ने दायर की है। संघ का आरोप है कि UTET कोई भर्ती परीक्षा नहीं है, बल्कि पहले से सेवारत शिक्षकों की सिर्फ पात्रता साबित करने की परीक्षा है।
ऐसे में इसमें SC, ST और OBC आरक्षण देना राज्य के आरक्षण नियमों का उल्लंघन है।
60% बनाम 40% पर सबसे बड़ा सवाल
संघ के जिला मंत्री रूपक पुरी ने कहा – अगर 15 से 25 साल से बच्चों को पढ़ा रहे एक सामान्य वर्ग के शिक्षक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के योग्य साबित करने के लिए 60% अंक लाने होंगे, तो उतनी ही सेवा वाले आरक्षित वर्ग के शिक्षक के लिए 40% ही क्यों? यह भेदभावपूर्ण है और एक समान मानक होना चाहिए।
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुभाष झिल्डियाल ने भी कहा कि विभाग को सबके लिए एक ही न्यूनतम अंक तय करना चाहिए। हम आरक्षण का विरोध करते हैं, ये नौकरी नहीं पात्रता परीक्षा है। LT शिक्षकों के लिए तो ये बाध्यता खत्म ही होनी चाहिए।
महिला और आंदोलनकारी आरक्षण भी गायब
याचिका में एक और विसंगति उठाई गई है। राज्य में मूल निवासी महिलाओं के लिए 30% क्षैतिज आरक्षण और चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों के लिए 10% क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इस पात्रता परीक्षा में इसे दरकिनार कर दिया गया, जबकि SC-ST आरक्षण दे दिया गया। साथ ही आरक्षित और सामान्य वर्ग से परीक्षा शुल्क में भी बड़ा अंतर रखा गया था।
50 हजार ने दी थी परीक्षा
बता दें कि 29 सितंबर को हुई इस TET परीक्षा को प्रदेश भर के करीब 50 हजार शिक्षकों और अभ्यर्थियों ने दिया था, जिसमें करीब 20 हजार सेवारत शिक्षक हैं। TET प्रथम (कक्षा 1 से 5 के लिए) करीब 24 हजार और TET द्वितीय (कक्षा 6 से 8 के लिए) करीब 42 हजार ने दी है, कई ने दोनों परीक्षाएं दी हैं।
अब इस आरक्षण रोस्टर को लेकर शिक्षक संघ हाई कोर्ट पहुंच गया है, जहां से कोर्ट में शिक्षा विभाग से 6 सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।












