रुद्रप्रयाग। भरत सिंह चौधरी को उत्तराखण्ड सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की घोषणा के बाद पूरे रुद्रप्रयाग जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई है। समर्थकों और क्षेत्रवासियों ने इसे जनपद के लिए गर्व का क्षण बताते हुए एक अनुभवी जनप्रतिनिधि को मिली बड़ी जिम्मेदारी बताया है। जगह-जगह मिठाइयां बांटी गईं और लोगों ने उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।
साधारण परिवार से राजनीति तक का सफर
भरत सिंह चौधरी का जन्म वर्ष 1959 में तत्कालीन चमोली जिले के रानीगढ़ पट्टी गडबू गांव में हुआ। उनके पिता स्व. सुबेदार छोटाण सिंह चौधरी रहे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय घोलतीर से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज गौचर, चमोली से पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने डीएवी कॉलेज, देहरादून से बी.ए. एलएलबी किया।
छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत
छात्र जीवन में वर्ष 1979 से 1982 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे। इसके बाद वर्ष 1985 में साधन सहकारी समिति (मिनी बैंक) नगरासू के अध्यक्ष बने। वर्ष 1988 में ग्राम पंचायत मरोड़ा के प्रधान और वर्ष 1990 में जिला परिषद चमोली के सदस्य के रूप में उन्होंने जनसेवा का दायित्व निभाया।
राजनीतिक सफर और चुनावी अनुभव
उन्होंने वर्ष 1993 और 1996 में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) से चुनाव लड़ा। वर्ष 2002 में उत्तराखण्ड गठन के बाद भी उन्होंने सक्रिय राजनीति जारी रखी। वर्ष 2007 और 2012 में रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा।
वर्ष 2013 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और 2017 में पार्टी प्रत्याशी के रूप में रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट से बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने करीब 30 हजार वोट हासिल कर कांग्रेस प्रत्याशी को लगभग 15 हजार मतों से हराया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 30 हजार से अधिक मत प्राप्त कर दोबारा जीत हासिल की।
विधानसभा में सक्रिय भूमिका
वर्तमान में वे उत्तराखण्ड विधानसभा की विभिन्न समितियों के सदस्य हैं और संस्कृत भाषा प्रोत्साहन समिति के सभापति के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। सामाजिक और सहकारी क्षेत्र में भी उनका लंबा अनुभव रहा है, जिसमें देवभूमि रचनात्मक सहकारी समिति के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है।
क्षेत्रवासियों को उम्मीदें
कैबिनेट मंत्री बनने के बाद क्षेत्र के लोगों को उनसे विकास कार्यों में तेजी आने और जनसमस्याओं के समाधान की नई उम्मीद जगी है। स्थानीय जनता का मानना है कि उनके अनुभव और जमीनी पकड़ से रुद्रप्रयाग समेत पूरे प्रदेश को लाभ मिलेगा।











