रुद्रप्रयाग की सियासत इस बार फिर गरम है। एक तरफ कांग्रेस के दिग्गज प्रदीप थपलियाल हैं, जिन्हें हर गली-मोहल्ले में लोग नाम से जानते हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा के मौजूदा विधायक भरत चौधरी हैं, जिनके पास सत्ता और संगठन की ताकत है।
बाजार में चाय की दुकान से लेकर केदारघाटी के गांवों तक बस एक ही चर्चा है – इस बार कौन?
चौधरी कैंप का दावा
“हमने काम किया है। केदारनाथ यात्रा पटरी पर आई, सड़कें बनीं, आपदा में हम खड़े रहे। डबल इंजन सरकार है तो काम भी डबल होगा।” उनके समर्थक कहते हैं कि विधायक रहते हुए उनकी पहुंच सीधे देहरादून-दिल्ली तक है।
थपलियाल कैंप का पलटवार
“पहुंच दिल्ली तक है, पर सुनवाई गांव में नहीं। पलायन, अस्पताल में डॉक्टर नहीं, युवा बेरोजगार – इन सवालों का जवाब कौन देगा?” थपलियाल समर्थकों का कहना है कि इस बार लोग बदलाव चाहते हैं और थपलियाल जमीन से जुड़े नेता हैं, हर सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं।
असली खेल कहां?
असली खेल जखोली और बसुकेदार, भरदार बेल्ट में है। जहां 15-20 हजार वोट इधर-उधर हुए तो पूरी बाजी पलट जाएगी। ब्राह्मण-ठाकुर समीकरण और युवा वोटर इस बार किंगमेकर बनेंगे।
फिलहाल मुकाबला 50-50 वाला है। एक तरफ सत्ता की हवा, दूसरी तरफ सत्ता विरोधी लहर। जनता किसे सिर-आंखों पर बिठाती है, ये तो गांव की चौपाल ही तय करेगी। जाखणी-टेंडवाल निर्माणाधीन मोटर मार्ग को लेकर पांच गावों की जनता आक्रोशित है। यह वर्तमान विधायक एवं कैबिनेट मंत्री के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इसी के साथ ही जानकारों का कहना है कि इस बार जनता परिवर्तन के मूड में है।








