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प्रेमचंद अग्रवाल प्रकरण : भाजपा बोली सड़क छाप नेता तो कांग्रेस बोली महेंद्र भट्ट का मानसिक संतुलन बिगड़ गया

March 8, 2025
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प्रेमचंद अग्रवाल प्रकरण : भाजपा बोली सड़क छाप नेता तो कांग्रेस बोली महेंद्र भट्ट का मानसिक संतुलन बिगड़ गया
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देहरादून। बीते दिन 6 मार्च को एक ओर जहाँ उत्तराखंड में पीएम मोदी आए तो वहीं दूसरी ओर गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की अगुवाई में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की बर्खास्तगी को लेकर गैरसैंण में जन आंदोलन हुआ।

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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

सरकार बहादुर पार्ट 3 : सरकार को नहीं सरोकार, उत्तराखंड की मुस्लिम बेटी नहीं जा पाई करियर बनाने के लिए

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इसको लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पार्टी व निर्दलीय पर निशाना साधते हुए कहा कि 2027 का चुनाव आने वाला है ऐसे में सड़क छाप नेताओं द्वारा आंदोलन‌ किया जा रहा है।

इस पर कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने तल्ख प्रतिक्रिया दी है। गरिमा दसौनी ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है। भारतीय जनता पार्टी शायद इस बात को समझ नहीं पा रही है या आंकने में गलती कर रही है कि प्रेमचंद अग्रवाल का सदन में दिया गया बयान राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह भावनात्मक मुद्दा है। गरिमा ने कहा कि प्रेमचंद अग्रवाल ने जो कुछ भी लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा के अंदर कहा उसने पहाड़ी समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया है और उनकी भावनाओं को बहुत चोट पहुंची है । परंतु उसे चोट पर मलहम लगाने की बजाय भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व बार-बार उसे पर नमक घिसने का काम कर रहा है।

बीते कुछ दिनों से प्रेमचंद अग्रवाल विधानसभा में पहाड़ियों के लिए कह गए अब शब्दों के लेकर विरोध झेल रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपनी इस बात के लिए माफी भी मांगी है लेकिन पहाड़ी समाज उनकी बर्खास्त की मांग को लेकर लगातार आंदोलनरत है।

मुद्दे को भुनाते हुए कांग्रेस और भाजपा में जुबानी जंग लगातार जारी है।

Tags: उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी
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