देहरादून। 2002 बैच के IFS अफसर संजीव चतुर्वेदी को लोकपाल में डेप्यूटेशन जॉइन करने के लिए उत्तराखंड सरकार से NOC मिलने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल है। Cockroach Janta Party नाम के सैटायर पेज ने पोस्ट कर इसे भारत की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई में दुर्लभ सकारात्मक कदम बताया है।
NOC का दावा लेकिन सरकारी पुष्टि नहीं
पोस्ट के मुताबिक उत्तराखंड सरकार ने संजीव चतुर्वेदी को लोकपाल जॉइन करने की इजाजत दे दी है। हालांकि 17 जून शाम तक उत्तराखंड सचिवालय की वेबसाइट या केंद्र के कार्मिक विभाग DoPT की साइट पर इस संबंध में कोई शासनादेश या प्रेस नोट पब्लिश नहीं हुआ है। ऑफिशियल पुष्टि अभी बाकी है।
कौन हैं संजीव चतुर्वेदी
संजीव चतुर्वेदी मूल रूप से उत्तराखंड कैडर के IFS अफसर हैं। हरियाणा में CCF रहते हुए 2012 से 2014 के बीच उन्होंने पेड़ कटाई, नर्सरी घोटाला और दवा खरीद में करोड़ों के घोटाले उजागर किए थे। इसके बाद उन्हें हरियाणा और केंद्र सरकार से NOC और कैडर क्लीयरेंस नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में केंद्र को फटकार लगाते हुए NOC रोकने पर सवाल उठाए थे। पिछले 10 साल से ज्यादा समय से वो लोकपाल में डेप्यूटेशन की मांग कर रहे हैं।
मामला क्यों अटका था
लोकपाल में जाने के लिए अफसर के मूल कैडर राज्य की NOC जरूरी होती है। संजीव चतुर्वेदी उत्तराखंड कैडर के हैं लेकिन विवाद के चलते फाइलें हरियाणा और केंद्र के बीच अटकती रही। लगातार कोर्ट और पत्रों के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार पर दबाव बनाया।
सोशल मीडिया पर रिएक्शन
Cockroach Janta Party की पोस्ट पर यूजर मिक्स रिएक्शन दे रहे हैं। कई लोग संजीव चतुर्वेदी को असली व्हिसलब्लोअर और हीरो कह रहे हैं। कुछ यूजर ऑफिशियल शासनादेश का लिंक मांग रहे हैं। कुछ इसे चुनाव से पहले उत्तराखंड सरकार का इमेज बिल्डिंग कदम बता रहे हैं। जब तक सरकारी नोटिफिकेशन नहीं आता, बहस जारी रहेगी।








