रिपोर्ट – हरीशचंद्र
रुद्रप्रयाग/ऊखीमठ। बाबा केदारनाथ की पंच गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में शुक्रवार से तनाव का माहौल रहा। अब मंदिर समिति में वर्षों से सेवा दे रहे ढोल वादकों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
भूख हड़ताल पर बैठे ढोल वादक हरीश चन्द्र का कहना है कि वे और उनके साथी विरेन्द्र लाल, विजय लाल पिछले कई वर्षों से मंदिर समिति के समक्ष अपनी समस्याएं रख रहे हैं। इस संबंध में कई बार पत्र और ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आरोप है कि समिति के कुछ कर्मचारियों ने उनके पत्रों को आगे नहीं बढ़ने दिया। मजबूर होकर अब उन्हें भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।
ढोल वादकों की सबसे बड़ी शिकायत वेतन और ड्यूटी को लेकर है। विरेन्द्र लाल ने बताया कि एक वादक को साल में सिर्फ दो महीने ही ड्यूटी मिलती है। बाकी 10 महीने बेरोजगार रहना पड़ता है। छह महीने में उन्हें 6 हजार 300 रुपये वेतन मिलता है, यानी पूरे साल में कुल 12 हजार 600 रुपये ही हाथ आते हैं। बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली जब धाम के लिए जाती है या वापस आती है, तब तीन ढोल वादकों को जाने के 6 हजार और आने के 6 हजार रुपये दिए जाते हैं।
वादकों का यह भी कहना है कि इस समय जब ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना हो रही है, तब भी उनके काम का बहिष्कार किया जा रहा है।
प्रमुख मांगें
वादकों ने मंदिर समिति से बाजीगर समाज के हक-हकूकारियों को स्थाई नियुक्ति देने, परंपरागत हकों को सम्मान के साथ लागू करने, लंबे समय से लंबित मांगों का निपटारा करने, समाज के साथ हो रहे भेदभाव को बंद करने और मंदिर की परंपरा में बाजीगर समाज के योगदान को मान्यता देने की मांग की है।
विरेन्द्र लाल ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे भूख हड़ताल से नहीं उठेंगे। इस दौरान राजू लाल, विजयपाल और सतेश्वरी देवी भी उनके साथ मौजूद रहीं।
मामले ने अब धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। मंदिर समिति से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।








