रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के टिहरी और रुद्रप्रयाग जिले में 3,360 मीटर की ऊंचाई पर फैला पंवाली कांठा बुग्याल प्रकृति का वह तोहफा है, जिसे अभी भी भीड़ ने छुआ नहीं है।
‘कांठा’ का मतलब होता है पर्वत की सबसे ऊपर की चोटी, और ‘बुग्याल’ यानी की हिमालय क्षेत्र की चरागाह सुंदर मखमली घास।
इन दिनों पंवाली कांठा बुग्याल अपनी सुंदरता को लेकर पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। देश-प्रदेश में पर्यटन के शौकीन युवा यहां आ रहे हैं।
उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए पर्यटक विपिन, मनीष, जितेन्द्र, अमित, मुकेश ने बताया कि यह एक खूबसूरत ट्रैक है, 18 किलोमीटर चलते हुए उन्हें थकान महसूस हुई थी। लेकिन जब वह बमुश्किल पंवाली पहुंचे तो वहां पहुंचते ही उनकी पूरी थकान दूर हो गई।

ऐसे ही सैकड़ो पर्यटक प्रत्येक वर्ष पंवाली पहुंचते हैं।
पंवाली कांठा बुग्याल दो जनपदों से जुड़ा है। इस खूबसूरत बुग्याल का कुछ हिस्सा टिहरी जनपद में पड़ता है, तो कुछ रुद्रप्रयाग जनपद में।
पौराणिक महत्व
स्थानीय मान्यता है कि पांडव स्वर्गारोहण के समय इसी रास्ते से गए थे। ‘पंवाली’ नाम ‘पांडव-आली’ यानी पांडवों के स्थान से बना है। मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिजुगीनारायण में विवाह के बाद केदारनाथ के लिए यहीं से प्रस्थान किया था। इसलिए लोग इस देवभूमि का ‘बालकनी’ भी कहते हैं।
इस खूबसूरत बुग्याल को लेकर पर्यटक मनीष ने चिंता जताते हुए बताया है कि यह बहुत खूबसूरत बुग्याल है, लेकिन सरकार द्वारा इस सुंदर जगह की अनदेखी की जा रही है। यहां पर ना तो बिजली की सुविधा है और ना ही मेडिकल। स्थानीय स्तर पर वन विभाग भी शौचालय देने में सक्षम नहीं है।

पर्यटक विपिन ने सरकार को सलाह देते हुए कहा है कि आने वाले पर्यटकों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में प्रशासन उनको समय रहते उचित सहायता उपलब्ध करा सके।
वहीं जितेंद्र ने नेटवर्क की चिंता को लेकर कहा है कि इतनी खूबसूरत जगह में मोबाइल नेटवर्क ना होने की दशा में पर्यटकों को असुविधा होती है।
अमित ने भी सुझाव देते हुए कहा है कि पर्यटन विभाग और वन विभाग उत्तराखंड को यहां पर बेरोजगारों को सस्ते दरों पर रिजॉर्ट या फिर होमस्टे दिए जाएं, जिससे कि स्थानीय युवाओं को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही पर्यटकों को भी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश धीमान ने बताया कि इतनी खूबसूरत जगह पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में अभी भी पर्यटन मानचित्र पर अंकित नहीं है। जमीनी संसाधनों के अभाव में स्थानीय लोग आज भी पिछड़ा जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकार को इस विषय में पहल करनी चाहिए।
ऐसे में पर्यटन विभाग और वन विभाग को चाहिए कि दिए गए सुझावों पर अमल किया जाए, जिससे कि पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा ही साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।








