उत्तराखंड। लंबे समय से राज्य के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने ‘चहेतों’ द्वारा दी गई उपाधि ‘धाकड़’ छवि को लेकर गुदगुदाहट महसूस कर रहे हों, लेकिन उनके कार्यकाल में जो भी घटित हो रहा है, उस से उत्तराखंड की जनता और शिक्षित बेरोजगार संतुष्ट नजर नहीं आ रही हैं। लगातार घोटाले और मनमानियां को लेकर सरकार कटघरे में है।
पाठकों का पसंदीदा न्यूज़ पोर्टल “उत्तराखंड डीटेल्स” इस मामले पर एक नजर डाल रहा है। उम्मीद है कि पाठक इसको गंभीरता से लेंगे।
बात करते हैं धामी सरकार के कार्यकाल मे घोटालों की
होमगार्ड वर्दी घोटाला 2024-25
होमगार्ड्स के लिए वर्दी और सामान खरीद में 3 करोड़ का भुगतान किया गया, जबकि असली कीमत सिर्फ 1 करोड़ थी। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी, नियमों का उल्लंघन हुआ।
24 जनवरी 2025 को CM धामी ने होमगार्ड निदेशक DIG अमिताभ श्रीवास्तव को सस्पेंड किया। संयुक्त जांच समिति बनाई गई।
सीएम धामी ने बयान दिया कि “भ्रष्टाचार को बिल्कुल न बर्दाश्त करने की नीति, दोषी पर कड़ी कार्रवाई होगी”।
हरिद्वार नगर निगम ने कूड़े के ढेर के पास अनुपयुक्त कृषि भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदा। न तो जमीन की जरूरत थी, न पारदर्शी बोली हुई। शासन के नियम दरकिनार किए गए।
धामी सरकार ने 2 IAS और 1 PCS समेत 12 अफसरों को सस्पेंड किया। जांच आधार पर कहा गया कि DM हरिद्वार कर्मेन्द्र सिंह, भूमि क्रय की अनुमति देने में भूमिका संदिग्ध हैं।
पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी द्वारा बिना प्रक्रिया के प्रस्ताव पारित किया। SDM अजयवीर सिंह ने जमीन निरीक्षण में लापरवाही, गलत रिपोर्ट भेजी गई औरविजिलेंस को सौंपी गई।
धामी सरकार का स्टैंड
CM धामी लगातार कह रहे हैं कि सरकार जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” नीति पर काम कर रही है। इन दोनों मामलों में खुद CM ने सस्पेंशन के आदेश दिए और कहा कि अब उत्तराखंड में ‘पद’ नहीं, ‘कर्तव्य’ और ‘जवाबदेही’ महत्वपूर्ण हैं।
ये दोनों घोटाले अधिकारियों के स्तर पर हुए हैं और CM हालांकि धामी ने इनमें कार्रवाई की है। धामी सरकार के मंत्रियों पर सीधे घोटाले के आरोप फिलहाल पब्लिक डोमेन में प्रमुखता से नहीं हैं। जांच अभी जारी है।
धामी सरकार ने ज्यादातर सामने आए घोटालों में कार्रवाई की है DM, IAS, PCS तक को सस्पेंड किया गया। लेकिन विपक्ष और कुछ रिपोर्ट्स में ऐसे आरोप भी लगे हैं जिनमें अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई या जांच धीमी है।
वक्फ संपत्तियों का मामला – अल्टीमेटम दिया, कार्रवाई बाकी
हरिद्वार में साढ़े 3 सौ से ज्यादा देहरादून में 188 और अल्मोड़ा में 14 वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज नहीं है। आरोप है कि कई संपत्तियों पर अवैध कब्जे हैं या रिकॉर्ड छुपाया गया।
सरकार का एक्शन 6 अगस्त 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। धामी सरकार ने कहा है कि इसके बाद “बुलडोजर चलेगा” और बड़े स्तर पर जांच होगी। अभी सिर्फ चेतावनी दी गई है। 6 अगस्त तक किसी पर FIR या सस्पेंशन नहीं हुआ। विपक्ष इसे “धार्मिक संस्था को निशाना बनाने” का आरोप लगा रहा है।
UKSSSC पेपर लीक 2022 इसमें 60+ गिरफ्तार हुए, लेकिन विपक्ष का दावा है कि “बड़े मगरमच्छ” अभी बाहर हैं। इस घोटाले की जड़ें पिछली सरकारों से जुड़ी बताई जाती हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती घोटाला आरोप लगे कि नियम बदलकर अपनों को फायदा पहुंचाया गया। जांच हुई, लेकिन किसी बड़े नेता/मंत्री पर गाज नहीं गिरी।
कांग्रेस और अन्य दल अक्सर इन मामलों में कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हैं
अंकिता भंडारी हत्याकांड VIP का नाम सामने लाने की मांग हुई, लेकिन पुलिस ने कहा “VIP का मतलब कोई व्यक्ति नहीं”। विपक्ष का आरोप है कि असली गुनहगार बच गए।
भू-कानून उल्लंघन आरोप है कि बाहरी लोगों को नियम तोड़कर जमीनें दी गईं, लेकिन बड़े बिल्डरों/नेताओं पर एक्शन नहीं हुआ।
यमुना और गंगा में अवैध खनन के आरोप लगते रहते हैं। छिटपुट कार्रवाई होती है, लेकिन “खनन माफिया” पर बड़ा एक्शन नहीं दिखा।
CM धामी का कहना है कि “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” है। होमगार्ड वर्दी घोटाले में DIG और हरिद्वार जमीन घोटाले में 2 IAS समेत 12 अफसर सस्पेंड किए। सरकार का दावा है कि “अब पद नहीं, कर्तव्य और जवाबदेही महत्वपूर्ण है”।
सरकार की नितियों से नाराज युवा अब ‘कॉकरोच’ पार्टी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, जो कि सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है!
हालांकि बेरोजगार युवाओं को रोजगार चाहिए, मजबूरन वह सरकार की नीतियों से नाराज, तब चाहे वह बीजेपी हो या कांग्रेस, शिक्षित युवाओं ने ‘कॉकरोच’ बना ही बेहतर समझा है।
उत्तराखंड में कॉकरोच पार्टी को लेकर युवाओं में आकर्षण है, जाहिर सी बात है कि वह वर्तमान सरकार की नीतियों से नाराज हैं। यह आक्रोशित युवा सरकार की मवासी घाम लगा सकते हैं। सरकार को ‘गोद’ में रहने से बेहतर युवाओं के उज्जवल भविष्य में सोचना होगा।








