देहरादून। ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों यानी VPDO के वार्षिक तबादलों को लेकर उत्तराखंड में विवाद खड़ा हो गया है। उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एसोसिएशन ने शासन को कई पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उत्तराखंड लोक सेवक वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से तबादले किए गए हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि 2017 के स्थानांतरण अधिनियम में सेवा अवधि, दुर्गम-सुगम क्षेत्र, महिला कार्मिकों और गंभीर बीमारियों से जुड़े जो स्पष्ट प्रावधान दिए गए हैं, उनका पालन नहीं किया गया। आरोप है कि तबादले पारदर्शिता के बिना और सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं।
एसोसिएशन ने शासन और पंचायती राज विभाग के उच्च अधिकारियों को इस संबंध में कई बार पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि मनमाने तबादलों से अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हुआ है और इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों पर पड़ेगा। VPDO पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं को लागू करने की अहम कड़ी होते हैं।
एसोसिएशन ने मांग की है कि तबादलों की समीक्षा कर उन्हें 2017 के अधिनियम के अनुसार संशोधित किया जाए। ऐसा न होने पर संगठन आंदोलन की चेतावनी भी दे रहा है।
फिलहाल शासन और पंचायती राज विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।








