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बड़ी खबर:पुरोला मामले पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

June 13, 2023
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बड़ी खबर:पुरोला मामले पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान
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पुरोला मसले पर  मुस्लिम विधायकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

 

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 नाबालिग लड़की को भगाने की कोशिश और एक खास समुदाय के व्यापारियों के उत्तरकाशी से पलायन का मामला सांप्रदायिक रंग लेता जा रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के ट्वीट के बाद गरमाये माहौल के बीच 15 जून को बुलाई गई महापंचायत रोकने के लिए जिलाधिकारी सोमवार को पुरोला पहुंचे।

 

दोनों समुदाय को समझाने के बावजूद कोई बात नहीं बनी।  पुरोला मसले पर कुछ मुस्लिम विधायकों ने सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने साफ कहा, किसी को भी कानून हाथ नहीं लेने दिया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। पुरोला में महापंचायत और समुदाय विशेष के लोगों के पलायन के मामले को सोमवार को औवेसी के ट्वीट ने नई हवा दे दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा-“भाजपा सरकार का काम है कि गुनहगारों को जेल भेजे और जल्द अमन चैन कायम करे। 15 जून को होने वाली महा पंचायत पर तुरंत रोक लगाई जाए। वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा प्रदान की जाए और वहां से पलायन कर गए लोगों को वापस बुलाने का इंतजाम किया जाए।”अध्यक्ष अंकित सिंह रावत ने एसडीएम को ज्ञापन देकर शांतिपूर्ण महापंचायत के प्रति अपना रुख स्पष्ट कर दिया तो दूसरी ओर जिलाधिकारी अभिषेक रुहेला ने महापंचायत रोकने की अपील की। प्रधान संगठन ने इससे साफ इंकार कर दिया। देर रात तक डीएम रुहेला और एसपी अर्पण यदुवंशी की कोशिशें जारी थीं।

 

पुरोला विवाद पर ओवैसी की प्रतिक्रिया  प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा को नागवार गुजरी। पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा, ओवैसी का लव जिहाद व लैंड जिहाद की पैरोकारी करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मनबीर सिंह चौहान ने कहा, ओवैसी  को न तो मुस्लिम समुदाय अपना नेता मानते हैं और न ही वो उनके हितैषी ही हैं। ओवेशी हमेशा नफरत फैलाकर  वोट बैंक की राजनीति करते हैं। राज्य में डेमोग्राफी चेंज की कोशिशों को किसी भी तरह से सफल नहीं होने दिया जाएगा। किसी को भी कानून को हाथ में नहीं लेना चाहिए, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उनके जहरीले बोल देवभूमि के शांतकानून को हाथ में नहीं लेना चाहिए, कोई भी कानून से

ऊपर नहीं है। उनके जहरीले बोल देवभूमि के 

वातावरण को अशांत नहीं कर सकते।

 

 मुस्लिम जनप्रतिनिधिमंडल ने पुरोला मामले में सोमवार की शाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स, लक्सर विधायक हाजी मौ. शहजाद, राज्य हज समिति के अध्यक्ष खतीब अहमद, वक्फ बोर्ड के सदस्य मोहम्मद अनीस, सदस्य इकबाल अहमद, राज्य हज समिति सदस्य नफीस अहमद ने मांग की कि पहाड़ में माहौल खराब कर रहे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की की जाए। पीढ़ियों से राज्य में रह रहे लोगों को कुछ असामाजिक तत्व प्रताड़ित कर रहे हैं। जिससे समुदाय विशेष के लोग पलायन कर रहे हैं।

जांच को भेजा पुरोला विवाद के बीच वायरल हुआ तोड़फोड़ का वीडियो पुलिस ने जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह वीडियो प्रथमदृष्टया बड़कोट का लग रहा है। ऐसे में एफएसल की जांच के बाद ही सत्यता पता चल सकती है। साथ ही आगामी 15 जून को प्रस्तावित महापंचायत की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए एडीजी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. वी मुरुगेशन ने एसपी उत्तरकाशी को निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि जो भी कानून हाथ में लेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

राजधानी में मुस्लिम समुदाय की महापंचायत 18 जून को पुरोला विवाद के बीच मुस्लिम समुदाय ने देहरादून में 18 जून को महापंचायत का ऐलान किया है। इसमें पर्वतीय इलाकों से मुस्लिम समाज के लोगों के पलायन पर चर्चा की जाएगी। पलटन बाजार स्थित जामामस्जिद के शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी ने कहा कि पर्वतीय इलाकों से समाज के लोगों का पलायन करना दुख की बात है। इसके विरोध में गांधी रोड स्थित पुराने बस स्टैंड के पीछे महापंचायत होगी, जिसमें प्रदेशभर से समाज के लोग प्रतिभाग करेंगे।

 

ट्वीटर पर यह मामला “सेव उत्तराखंड,” “सेव उत्तराखंड हिंदू” “सेव उत्तराखंड मुस्लिम” हैशटैग से ट्रेंड करने से सियासत गरमाई तो सरकार भी हरकत में आ गई है।

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सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

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