नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सरकारी आदेशों को नजरअंदाज करने पर शहरी विकास विभाग के सचिव नितेश कुमार झा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है। कोर्ट का मानना है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद फाइल महीनों तक ठंडे बस्ते में डाली रही।
दरअसल शहरी विकास निदेशालय में शहरी अवसंरचना विशेषज्ञ के पद पर तैनात रहे विस्तार गुप्ता को 17 मार्च 2026 को अचानक सेवा से मुक्त कर दिया गया था। इस फैसले से आहत होकर विस्तार गुप्ता हाई कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के बाद 28 अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए कहा कि वे दो हफ्ते के अंदर सचिव के सामने अपना पक्ष और पुनर्नियोजन का अनुरोध रखें। अदालत ने यह भी साफ किया था कि अगर समय पर अर्जी आ जाती है तो सचिव को 10 हफ्ते के भीतर उस पर अंतिम फैसला लेना होगा।
विस्तार गुप्ता ने 5 मई को ही सचिव नितेश कुमार झा के कार्यालय में अपना प्रतिनिधित्व और कोर्ट के आदेश की कॉपी जमा कर दी। लेकिन इसके बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ा। 10 हफ्ते की समयसीमा निकल गई, मगर सचिवालय से कोई जवाब नहीं आया।
इसी देरी और लापरवाही को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने अब शहरी विकास सचिव को अवमानना नोटिस भेजकर पूछा है कि आखिर न्यायालय के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। अब सचिव को कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा और बताना होगा कि फाइल क्यों रुकी रही।
कानूनी जानकारों के मुताबिक यह मामला प्रदेश में नौकरशाही की कार्यशैली और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।








