सिक्किम। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद पूर्वोत्तर राज्य में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को उनकी नियुक्ति की घोषणा की थी, जिसके बाद से सिक्किम, उत्तराखंड और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
सिक्किम के मुख्य विपक्षी दल सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) और कांग्रेस ने अलग-अलग कार्यक्रम कर नियुक्ति पर सवाल उठाए।
SDF की महिला विंग की प्रभारी कोमल चामलिंग ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उनकी पार्टी अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने इस नियुक्ति को राज्य की महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गंगटोक में प्रदर्शन कर मांग की कि जब तक केंद्रीय जांच एजेंसी अंकिता भंडारी हत्याकांड में तथाकथित VIP एंगल की जांच पूरी नहीं करती, तब तक गौतम को कार्यभार नहीं संभालने दिया जाए।
यह विवाद 2022 के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा है। 19 वर्षीय अंकिता ऋषिकेश के रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं और 18 सितंबर 2022 को लापता होने के बाद उनका शव चिलला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को 30 मई 2025 को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
शुरुआत से ही इस केस में एक प्रभावशाली व्यक्ति यानी ‘VIP’ की भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है। हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर वायरल कुछ ऑडियो-वीडियो और दावों के जरिए दुष्यंत गौतम का नाम इस विवाद से जोड़ा गया।
हालांकि, गौतम ने इन आरोपों का खंडन किया है और उन्हें निराधार बताया है। वह हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए तीन आरोपियों में शामिल नहीं हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं। CBI की ओर से VIP एंगल की जांच की बात कही जा रही है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
उधर, अंकिता के पिता संदीप भंडारी ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दिया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उनसे मुलाकात की और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर राज्यपाल को मिलने वाली संवैधानिक छूट (अनुच्छेद 361) का हवाला देते हुए नियुक्ति पर पुनर्विचार का आग्रह किया। अब सिक्किम में भी विरोध प्रदर्शन होने के चलते दुष्यंत गौतम की मुश्किलें बढ़नी तय हैं।










