जखोली। प्रधानमंत्री आवास योजना में रुद्रप्रयाग जनपद से भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि योजना का लाभ जरूरतमंदों को देने की बजाय सक्षम और पूंजीपति परिवारों को दे दिया गया है।
यहां बता दें कि विकासखंड जखोली की 108 ग्राम पंचायतों और 40 क्षेत्र पंचायतों से लगातार लाभार्थियों के चयन में धांधली की शिकायतें मिल रही हैं।
सबसे ताजा मामला ग्राम पंचायत धनकुराली से सामने आया है। यहां ग्राम प्रधान पर आरोप है कि प्रधान द्वारा मनमाने तरीके से सर्वे कर 16 परिवारों को पीएम आवास के लिए चिन्हित किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे में पात्रता के नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया, और गांव में पीएम आवास संबंधित कोई बैठक आयोजित नहीं की गई है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 82 वर्षीय वृद्ध महिला दौला देवी का नाम सूची में नहीं है। दौला देवी के पति का निधन कई वर्ष पहले हो चुका है और परिवार में उनका कोई सदस्य भी नहीं है। पारिवारिक मजबूरी के चलते वह पड़ोस में अपने परिजनों के साथ वह रहने को मजबूर हैं। इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला।
स्थानीय जनता का कहना है कि धनकुराली अकेली पंचायत नहीं है। जखोली ब्लॉक की कई पंचायतों में इसी तरह प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया गया है, जबकि असली हकदार योजना से वंचित रह गए। पंचायत प्रतिनिधियों की मनमानी से नाराज लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामिणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह की गड़बड़ी गरीबों के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई कर पात्र लाभार्थियों को तुरंत आवास का लाभ दिया जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह राणा ने उप जिला अधिकारी को लिखित शिकायत में बताया है कि ग्राम प्रधान ने उचित लाभार्थियों को दरकिनार कर पूंजीपतियों को योजना का लाभ दिया है।
इस संबंध में उप जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए खंड विकास अधिकारी से संपर्क कर मामले की जांच के निर्देश दिए।
खंड विकास अधिकारी से जब मोहन सिंह राणा द्वारा संपर्क करने की कोशिश की गई, तो न वह कार्यालय पर मिले और ना ही उन्होंने फोन रिसीव किया।
मोहन सिंह राणा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि ग्राम पंचायत धनकुराली में प्रधानमंत्री आवास के तहत चयनित फर्जी 16 लाभार्थियों की सूची को रद्द करते हुए, उक्त सर्वे पर दोबारा सर्वे कर उचित लाभार्थियों को निष्पक्ष भाव से सरकारी योजना के तहत चयनित किया जाए, अन्यथा हमें उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।








