ऋषिकेश। उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर ऋषिकेश सीट पर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। दो बार से प्रदेश में भाजपा की सरकार है, लेकिन इस बार ऋषिकेश की लड़ाई पहले से ज्यादा दिलचस्प मानी जा रही है।
ऋषिकेश भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। राज्य बनने के बाद 2002 में एक बार कांग्रेस के शूरवीर सिंह सजवाण यहां से जीते थे, उसके बाद 2007 से लगातार प्रेमचंद अग्रवाल चार बार विधायक चुने गए। वह विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2022 का चुनाव भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर जीता था, लेकिन इस बार कई सीटों पर भाजपा के लिए राह आसान नहीं मानी जा रही।
इस बीच वर्तमान विधायक प्रेमचंद अग्रवाल का विधानसभा में दिया गया बयान उन पर भारी पड़ा। पहाड़ी मूल के लोगों को लेकर की गई टिप्पणी के बाद प्रदेश भर में विरोध हुआ और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। माना जा रहा है कि इस बयान के कारण पार्टी के अंदर भी उनके विरोधी सक्रिय हो गए हैं।
नगर निगम ऋषिकेश के हालिया चुनाव में पहाड़ी बनाम मैदानी का मुद्दा जोर-शोर से उठा था, लेकिन जनता पर उसका असर नहीं दिखा और भाजपा के शम्भू पासवान मेयर बन गए। ऐसे में विधानसभा चुनाव में वोटर का मिजाज क्या रहेगा, यह देखना अहम होगा।
2027 के लिए भाजपा में टिकट के कई दावेदार सामने आ रहे हैं। प्रेमचंद अग्रवाल के अलावा युवा चेहरे प्रतीक कालिया, पूर्व मेयर अनिता ममगाई, महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल और भगत राम कोठारी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस से पूर्व विधायक शूरवीर सजवाण का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है, जबकि पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे जयेंद्र रमोला भी लगातार जनसंपर्क कर चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।
अब ऐसे में युवा नेता जयेन्द्र रमोला कांग्रेस से बहुमत प्राप्त करने की और दिख रहे हैं, तो भाजपा से भगतराम कोठारी भी मजबूत कैंडिडेट हैं। देखना दिलचस्प होगा कि दोनों पार्टियां किन प्रत्याशियों पर दांव लगाती हैं और किन को दरकिनार करती हैं।






