देहरादून। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में भाजपा जहां संगठन को मजबूत कर बूथ स्तर तक किलेबंदी में जुटी है, वहीं उत्तराखंड कांग्रेस में एक बार फिर बिखराव और बगावत के संकेत गहराने लगे हैं। पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हरीश रावत और हाईकमान के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है।
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व ने हरीश रावत को प्रदेशव्यापी यात्रा और जनसंपर्क कार्यक्रम फिलहाल स्थगित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री अपनी जिद पर कायम हैं और कुछ मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों को साथ लेकर प्रदेश भ्रमण पर निकल पड़े हैं। इससे साफ है कि यह लड़ाई अब हरीश रावत बनाम संगठन की बनती जा रही है।
राजनीतिक जानकार इसे हरीश रावत के सियासी करियर का सबसे बड़ा अंदरूनी संग्राम मान रहे हैं, जहां वह अपनी ही पार्टी के भीतर अपनी प्रासंगिकता की लड़ाई लड़ रहे हैं।
हरीश रावत ने दिया बड़ा संदेश – लक्ष्य सीएम बनना नहीं, उत्तराखंड बनाना होना चाहिए
इसी बीच हरीश रावत ने पार्टी की रणनीति पर बड़ा बयान देकर नया विमर्श छेड़ दिया है।
हरदा ने कहा, “कांग्रेस को मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हम उत्तराखंड को कैसे बेहतर बना सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि 2027 की लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि विजन की होनी चाहिए। “लड़ाई 10 साल बनाम 15 साल की होनी चाहिए। कांग्रेस के 10 साल का रोडमैप क्या था और भाजपा के 15 साल में प्रदेश कहां खड़ा है, इसका तुलनात्मक रिपोर्ट कार्ड हमें जनता के सामने रखना चाहिए।”
उधर, जसपुर से रामनगर तक प्रस्तावित उनकी यात्रा को लेकर हाईकमान की नाराजगी, राहुल गांधी की असहमति और प्रभारी कुमारी शैलजा द्वारा नोटिस भेजे जाने की चर्चाओं के बाद भी यात्रा जारी रहने से कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर सुर्खियों में है।











