ऋषिकेश। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को आयोजित हुआ है, लेकिन उससे पहले उत्तराखंड में योग को लेकर दो तरह की बहस चल रही है। एक तरफ सरकार बड़े कार्यक्रम कर रही है, दूसरी तरफ विरोध और सवाल भी उठ रहे हैं।
आयुष मंत्रालय के योग संगम पोर्टल पर देशभर से 65 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए हैं। राजस्थान से 14 हजार, तेलंगाना से 7 हजार पंजीकरण हैं। योग की कर्मभूमि माने जाने वाले उत्तराखंड से सिर्फ 748 रजिस्ट्रेशन ही हुए हैं। मंत्रालय के अधिकारी कह रहे हैं कि ये स्वैच्छिक है, 21 जून से पहले लक्ष्य पूरा हो जाएगा। लेकिन पूरा नहीं हुआ।
सोशल मीडिया पर योग शिक्षकों का एक गीत तेजी से वायरल हो रहा है। गीत का नाम है ‘योग का पैसा कहां गया, जनता को हिसाब दो’। इसमें योग शिक्षक स्थायी नियुक्ति, सही सम्मान और अधिकार की मांग कर रहे हैं। गीत में अरबों के खर्च का हिसाब मांगने और योग्यता का मान बढ़ाने की बात है। योग शिक्षक एकता आंदोलन से प्रेरित ये गीत योग दिवस से पहले सरकार पर दबाव बना रहा है।
ऋषिकेश के कीर्तन फेस्ट को लेकर 2025 का वीडियो फिर वायरल हो रहा है। उसमें दावा था कि भारतीयों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा, विदेशियों को प्राथमिकता मिल रही है। आयोजकों ने तब कहा था कि सीटें सीमित थीं और प्री-रजिस्ट्रेशन था, कोई राष्ट्रीयता आधारित बैन नहीं था। लेकिन नो एंट्री फॉर इंडियंस जैसी हेडलाइन ने आयोजन की छवि पर सवाल खड़े किए थे। 2026 में भी लोग पूछ रहे हैं कि क्या वही कहानी दोहराई जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी 21 जून 2025 को गैरसैंण में देश की पहली योग नीति जारी कर चुके हैं। नीति के तहत 2030 तक उत्तराखंड में पांच नए योग हब बनेंगे। जागेश्वर, मुक्तेश्वर, व्यास घाटी, टिहरी झील और कोलीढेक झील को योग के रूप में विकसित किया जाएगा। मार्च 2026 तक सभी आयुष हेल्थ और वेलनेस सेंटर में योग सेवाएं देने का लक्ष्य है। पर्वतीय क्षेत्रों में योग केंद्र खोलने पर 50 फीसदी तक 20 लाख की सब्सिडी और रिसर्च पर 10 लाख तक अनुदान का प्रावधान है।
16 मार्च 2026 को ऋषिकेश के मुनि की रेती में सात दिन का इंटरनेशनल योग फेस्टिवल शुरू हुआ। इसमें 80 से ज्यादा देशों के करीब 1500 योग साधक और प्रेमी जुटे। परमार्थ निकेतन में भी 80 देशों के 1200 साधक शामिल हुए। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योग सिर्फ व्यायाम नहीं, जीवन जीने का तरीका है। राज्य को योग और वैलनेस की वैश्विक राजधानी बनाने की बात दोहराई।
योग दिवस के नाम पर सरकार बड़े आयोजन और नीति की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ रजिस्ट्रेशन के कम आंकड़े, योग शिक्षकों का हिसाब मांगना और विदेशियों को प्राथमिकता वाले पुराने विवाद से लोग इसे नौटंकी कह रहे हैं। असली तस्वीर 21 जून के मुख्य कार्यक्रम के बाद ही साफ होगी।








