देहरादून। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत अगर किसी ने आपके वोट को लेकर फर्जी आपत्ति दर्ज कराई है तो अब आप उसके खिलाफ पुलिस में FIR करा सकते हैं। चुनाव आयोग ने इसके लिए विकल्प खोल दिया है। दरअसल SIR के तहत 14 जुलाई से 13 अगस्त तक वोट पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया था। इस दौरान प्रदेशभर में 1,30,382 मतदाताओं के नाम पर आपत्तियां दर्ज हुई थीं, जिनमें सबसे ज्यादा 43,878 आपत्तियां ऊधमसिंह नगर में आई थीं। इसके अलावा हरिद्वार में 29,369, देहरादून में 19,402 और नैनीताल में 18,301 आपत्तियां दर्ज हुई थीं। आयोग के ईआरओ और एईआरओ ने ज्यादातर आपत्तियों का निस्तारण कर दिया है और बड़ी संख्या में आपत्तियां नियमानुसार गलत पाए जाने पर खारिज भी कर दी गई हैं। कई मामलों में प्रभावित मतदाताओं ने प्रमाण सहित अपना पक्ष रखा तो आपत्ति फर्जी पाई गई।
अब ऐसे प्रभावित मतदाता आपत्तिकर्ता के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें संबंधित ईआरओ या एईआरओ कार्यालय से फॉर्म-7 की प्रति और आपत्तिकर्ता का विवरण आरटीआई के माध्यम से लेना होगा। साथ ही बीएलओ की रिपोर्ट और उन्हें प्राप्त नोटिस की प्रति भी लेनी होगी। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी को लिखित आवेदन देना होगा कि आपत्ति पूरी तरह झूठी है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-31 के तहत कार्रवाई की जाए। इसके बाद प्राप्त फर्जी प्रपत्र की प्रति और अपने वैध निवासी प्रमाण-पत्रों को संलग्न कर स्थानीय थाने में बीएनएस की धाराओं और आरपीए की धारा-31 के तहत FIR दर्ज कराई जा सकती है।
इस मामले में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने कहा है कि अगर किसी के वोट पर फर्जी आपत्ति दर्ज हुई है तो वह व्यक्तिगत तौर पर प्रमाण के साथ पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकता है। पुलिस में यह FIR कई धाराओं में दर्ज हो सकती है, जिसमें धारा 236 के तहत कानूनी घोषणा में मिथ्या कथन, धारा 228 और 229 के तहत झूठे साक्ष्य गढ़ना और प्रस्तुत करना, धारा 336 के तहत जालसाजी कर फर्जी प्रपत्र तैयार करना, धारा 340(2) के तहत फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में प्रयोग करना और धारा 61(2) के तहत आपराधिक षडयंत्र की धाराएं शामिल हैं, जो तब लगेंगी जब एक से अधिक लोगों ने मिलकर वोट कटवाने की साजिश की हो।









