देहरादून/ऋषिकेश। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनवीर चौहान द्वारा कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ताओं को लेकर दिए गए कथित “गधे-घोड़े” और “लूले-लंगड़े” वाले बयान पर पार्टी के अंदर ही घमासान मच गया है। वरिष्ठ उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी और पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मनवीर चौहान से तत्काल सार्वजनिक माफी की मांग की है।
प्रदेश प्रवक्ता को भेजे गए अपने पत्र में कोठारी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जैसे विशाल संगठन में प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान और स्वाभिमान है। किसी भी कार्यकर्ता की पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि के आधार पर उसका उपहास उड़ाना पार्टी की मूल भावना और संगठनात्मक संस्कारों के खिलाफ है।
कोठारी ने उठाए तीखे सवाल
भगत राम कोठारी ने कहा, “यदि हम जैसे कर्मठ, निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए ये शब्द थे, जिन्होंने भाजपा की विचारधारा को स्वीकार कर संगठन को मजबूत किया है, तो सवाल ये है कि यदि कांग्रेस से आए लोग लूले-लंगड़े थे और उनकी विचारधारा गलत थी, तो फिर पार्टी ने उन्हें सम्मिलित कर संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण दायित्व क्यों सौंपे?”
कैबिनेट के आंकड़ों से दिया करारा जवाब
अपने पत्र में कोठारी ने इतिहास और वर्तमान के तथ्य भी रखे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से 2022 तक उत्तराखंड कैबिनेट में 11 में से 5 मंत्री कांग्रेस से भाजपा में आए हुए थे, जबकि 6 भाजपा पृष्ठभूमि से थे। इसी तरह वर्तमान कैबिनेट 2022-2027 में 11 में से 6 मंत्री कांग्रेस से भाजपा में आए हैं और 5 भाजपा पृष्ठभूमि से हैं। ऐसे में कांग्रेस से आए कार्यकर्ताओं के योगदान को अपमानजनक शब्द कहना उनकी निष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगाना है।
“हर कार्यकर्ता भाजपा परिवार का अभिन्न अंग है”
कोठारी ने कहा कि भाजपा में शामिल होने वाला हर कार्यकर्ता भाजपा परिवार का अभिन्न अंग है, कोई बाहरी या दोयम दर्जे का सदस्य नहीं है। विचारधारा स्वीकार करने के बाद सभी को समान सम्मान मिलना चाहिए। आज देश में कई मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री हैं जो कांग्रेस या अन्य दलों से आकर भाजपा की विचारधारा के लिए निष्ठा से काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हम जैसे राज्य आंदोलनकारी योद्धा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की राष्ट्रवादी विचारधारा और सशक्त नेतृत्व से प्रभावित होकर भाजपा परिवार में शामिल हुए हैं।
अंत में उन्होंने मांग की कि मनवीर चौहान जी अपने बयान की गंभीरता को समझें, तुरंत सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगें और भविष्य में किसी भी समर्पित कार्यकर्ता के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचाएं।











