Thursday, August 13, 2026
  • Privacy Policy
  • Term & Condition
  • Contact
Uk Details
  • Home
  • ट्रेंडिंग
  • एक्सक्लूसिव
  • खुलासा
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • हेल्थ
  • हादसा
  • हाईकोर्ट न्यूज
  • अपराध
  • खेल
No Result
View All Result
Uk Details
Home Uncategorized

चारधाम यात्रा : 28 दिनों में अब तक 37 श्रद्धालुओं की मौत

May 28, 2025
in Uncategorized, एक्सक्लूसिव
0
चारधाम यात्रा : मंदिर समिति का एडवांस दल केदारनाथ रवाना 
Share on FacebookShare on Whatsapp

 

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत ना हो, इसके लिए शासन से लेकर पुलिस-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तमाम इंतजाम करता है। फिर भी कई श्रद्धालुओं की तबीयत खराब होने के कारण मौत हो जाती है। इस साल 30 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में अभी तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं। ऐसे में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिरकार इन मौत की बड़ी वजह क्या है?

Related posts

सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

सरकार बहादुर पार्ट 3 : सरकार को नहीं सरोकार, उत्तराखंड की मुस्लिम बेटी नहीं जा पाई करियर बनाने के लिए

August 13, 2026
तमक नाला हादसा  : लापता शख्स की तलाश तीसरे दिन भी जारी, रेस्क्यू में जुटीं 6 एजेंसियां

तमक नाला हादसा  : लापता शख्स की तलाश तीसरे दिन भी जारी, रेस्क्यू में जुटीं 6 एजेंसियां

August 13, 2026

सबसे पहले उत्तराखंड चारधाम और हेमकुंड साहिब के बारे में जानते है। केदारनाथ धाम समुद्र तल से करीब 3,584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। वहीं बदरीनाथ धाम 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गंगोत्री धाम उत्तराखंड के चारों धामों में ऊंचाई के मामले में तीसरे नंबर पर है। गंगोत्री धाम की ऊंचाई 3,415 मीटर है। यमुनोत्री धाम की ऊंचाई 3,291 मीटर है। जबकि हेमकुंड साहिब की ऊंचाई 4,329 मीटर है। देखा जाए तो हेमकुंड साहिब की ऊंचाई केदारनाथ से भी अधिक है। जबकि हेमकुंड साहिब में मृत्यु दर शून्य के बराबर है।
जबकि सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है हेमकुंड साहिब ही है।

इसी तरह से भारत के अगर ऊंचाई वाले क्षेत्र की हम बात करें जहां पर सबसे अधिक लोग जाते हैं और रहते भी हैं, उनमें लेह लद्दाख शामिल है। लद्दाख की ऊंचाई 3,529 मीटर है। जबकि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के दो क्षेत्र तवांग और ज़ुलुक भी 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जहां पर सालाना पर्यटक जाते हैं। इसी तरह से हिमाचल का काज़ा भी 3,650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। फिर भी यहां पर हृदय गति रुकने से इतने लोगों की जान शायद ही साल भर में जाती होगी।

इस साल के मौत के आंकड़े

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जितनी मौतें उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के दौरान सड़क हादसों में होती हैं, उतनी ही मौतें चार धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की हृदय गति रुकने या तबीयत खराब होने की वजह से भी जाती है। उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो पता लगता है कि साल 2024 में भी 52 श्रद्धालुओं की जान गई थी, जिसमें सबसे अधिक मौत केदारनाथ में हुई थी। यहां पर 23 लोग यात्रा के दौरान अपनी जान गंवा बैठे थे। जबकि बदरीनाथ में 14, यमुनोत्री में 12 और गंगोत्री में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई थी।

Tags: चारधाम यात्रा
Previous Post

बड़ी खबर : धामी मंत्रिमंडल की बैठक आज, पंचायत चुनाव सहित इन मुद्दों पर लगा सकती है मुहर

Next Post

ब्रेकिंग : 9 विधायकों को सीबीआई ने भेजे समन

Next Post
ब्रेकिंग : 9 विधायकों को सीबीआई ने भेजे समन

ब्रेकिंग : 9 विधायकों को सीबीआई ने भेजे समन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RECOMMENDED NEWS

क्राइम न्यूज़: घर की नौकरानी ने किया घर के माल पर हाथ साफ पुलिस ने किया गिरफ्तार

क्राइम न्यूज़: घर की नौकरानी ने किया घर के माल पर हाथ साफ पुलिस ने किया गिरफ्तार

3 years ago
बड़ी खबर : गोमांस मिलने पर बवाल, कई दुकानों में तोड़फोड़ और पथराव

बड़ी खबर : गोमांस मिलने पर बवाल, कई दुकानों में तोड़फोड़ और पथराव

9 months ago
बड़ी खबर : रुद्रप्रयाग में वाहन के ऊपर गिरा बोल्डर, दो की दर्दनाक मौत वहीं तीन गंभीर घायल

बड़ी खबर : रुद्रप्रयाग में वाहन के ऊपर गिरा बोल्डर, दो की दर्दनाक मौत वहीं तीन गंभीर घायल

12 months ago
बड़ी खबर : राजधानी दून में आज रोड डायवर्जन, जानिए नया रूट

बड़ी खबर : राजधानी दून में आज रोड डायवर्जन, जानिए नया रूट

5 months ago

BROWSE BY CATEGORIES

  • Uncategorized
  • अपराध
  • एक्सक्लूसिव
  • खुलासा
  • खेल
  • ट्रेंडिंग
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • हाईकोर्ट न्यूज
  • हादसा
  • हेल्थ

POPULAR NEWS

  • खुशखबरी :- उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने खोला युवाओं के लिए नौकरीयों का पिटारा

    खुशखबरी :- उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने खोला युवाओं के लिए नौकरीयों का पिटारा

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • खुशखबरी : आउटसोर्सिंग के माध्यम द्वारा होने जा रही हैं उत्तराखंड में बड़ी भर्तियां

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • ब्रेकिंग : 2 अगस्त से आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों के लिए बड़ी अपडेट , शिक्षा मंत्री से इन दो मांगों पर बनी सहमति

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • बिग ब्रेकिंग : विवादित मशरूम गर्ल दिव्या रावत गिरफ्तार

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • ब्रेकिंग : पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट से अहम खबर

    0 shares
    Share 0 Tweet 0

Uk Details

Uk Details

Uk Details

News & Media Website

Uk Details is a News & Media Website .

Follow us on social media:

Recent News

  • सरकार बहादुर पार्ट 3 : सरकार को नहीं सरोकार, उत्तराखंड की मुस्लिम बेटी नहीं जा पाई करियर बनाने के लिए
  • तमक नाला हादसा  : लापता शख्स की तलाश तीसरे दिन भी जारी, रेस्क्यू में जुटीं 6 एजेंसियां
  • सरकार बहादुर पार्ट 2 : मुख्यमंत्री की नई कोचिंग योजना में रोजगार, जमीन पर बेरोजगारी” बेरोजगार बोले – “कोचिंग से पेट नहीं भरता, नौकरी दो”

Category

  • Uncategorized
  • अपराध
  • एक्सक्लूसिव
  • खुलासा
  • खेल
  • ट्रेंडिंग
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • हाईकोर्ट न्यूज
  • हादसा
  • हेल्थ

Recent News

सरकार बहादुर पार्ट 3 : उत्तराखंड की बेटा सायरा सरकार की नितियों से परेशान, सोशल मीडिया पर हो रहा वीडियो वायरल  देहरादून। उत्तराखंड की बेटी सायर ने नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। देहरादून के CNI Girls School की कक्षा 12 की छात्रा सायरा ने अपनी मेहनत से इंटरनेशनल स्पर्धा के लिए भी क्वालीफाई किया। लेकिन सरकार की गलत नीतियों और उदासीनता की वजह से उसका सपना अधूरा रह गया।  10 अगस्त 2026 को देहरादून में हुए ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में जब सायरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने पहुंची तो उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि इंटरनेशनल टूर्नामेंट में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये चाहिए थे। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि इतनी रकम जुटा पाती। नतीजा ये हुआ कि देश के लिए खेलने का मौका हाथ से चला गया।  यही है सरकार की “खेल नीति” की सच्चाई। एक तरफ ढोल पीटा जाता है “खेलो इंडिया” का, दूसरी तरफ गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी को बुनियादी मदद के लिए भी तरसना पड़ता है। सायरा के जिले में आज तक एक भी सरकारी ताइक्वांडो सेंटर नहीं बना। प्रैक्टिस के लिए हर महीने 8000 रुपये प्राइवेट हॉल को देने पड़ते हैं। बरसात में सरकारी स्टेडियम बंद रहते हैं या वीआईपी के नाम बुक रहते हैं। नेशनल के बाद मिलने वाला यात्रा भत्ता और प्रोत्साहन राशि आज भी फाइलों में अटकी है।  सायरा के माता-पिता ने कर्ज लेकर बेटी को नेशनल तक पहुंचाया। उन्हें उम्मीद थी सरकार सहयोग करेगी। लेकिन जब मदद मांगी तो जवाब मिला बजट नहीं है। वहीं जीत के बाद अफसर और नेता फोटो खिंचवाकर “बेटी बचाओ” का भाषण दे देते हैं।  सायरा का सवाल सरकार से सीधा है। अगर एक नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट को डेढ़ लाख की कमी के कारण पीछे बैठना पड़े तो आम खिलाड़ी क्या करेगा? खिलाड़ियों और अभिभावकों की मांग है कि तुरंत हर जिले में फ्री कोचिंग, समय पर किट और भत्ता, और इंटरनेशनल जाने वाले खिलाड़ियों के लिए फंड की व्यवस्था हो।  साफ है सरकार को मेडल से मतलब है, खिलाड़ी से नहीं। जब तक नीतियां कागजों तक सीमित रहेंगी, सायरा जैसी बेटियां गोल्ड जीतकर भी अपने सपने बेचने को मजबूर रहेंगी। सायरा एक एनसीसी कैडेट भी है, सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के खोखले दावे करती है, इन दावों में कितना दम है यह धरातल पर पता चल रहा है।

सरकार बहादुर पार्ट 3 : सरकार को नहीं सरोकार, उत्तराखंड की मुस्लिम बेटी नहीं जा पाई करियर बनाने के लिए

August 13, 2026
तमक नाला हादसा  : लापता शख्स की तलाश तीसरे दिन भी जारी, रेस्क्यू में जुटीं 6 एजेंसियां

तमक नाला हादसा  : लापता शख्स की तलाश तीसरे दिन भी जारी, रेस्क्यू में जुटीं 6 एजेंसियां

August 13, 2026
  • Privacy Policy
  • Term & Condition
  • Contact

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.

No Result
View All Result
  • Home
  • ट्रेंडिंग
  • एक्सक्लूसिव
  • खुलासा
  • राजनीति
  • शिक्षा
  • हेल्थ
  • हादसा
  • हाईकोर्ट न्यूज
  • अपराध
  • खेल

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.