ऋषिकेश। स्थानीय अदालत ने चेक बाउंस (NI Act की धारा 138) के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अभियुक्ता को दोषी करार दिया है। न्यायालय अपर सिविल जज (जू०डि०)/जे०एम०, ऋषिकेश, अभिषेक कुमार मिश्र ने अभियुक्ता सुरुचि शर्मा को 3 माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 2018 का है। परिवादी (शिकायतकर्ता) ने अभियुक्तगण को 4 लाख रुपए की राशि उधार दी थी, जिसके बदले में अभियुक्ता द्वारा एक चेक (संख्या-325740) जारी किया गया था। जब परिवादी ने यह चेक बैंक में लगाया, तो वह “Funds Insufficient” और “Payment stopped by drawer” की टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद राशि का भुगतान न किए जाने पर परिवादी ने न्यायालय की शरण ली।
अदालत का फैसला
दौरान-ए-मुकदमा अभियुक्त पक्ष ने तर्क दिया था कि चेक चोरी हुआ था, लेकिन न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर इस बचाव को विश्वसनीय नहीं माना।
अदालत ने अपने आदेश में कहा
अभियुक्ता सुरुचि शर्मा को 3 माह के सश्रम कारावास की सजा दी जाती है।
उन पर कुल ₹4,55,000/- का जुर्माना लगाया गया है।
जुर्माने की राशि में से ₹4,50,000/- परिवादी को बतौर प्रतिकर (Compensation) दिए जाएंगे।
जुर्माना अदा न करने की स्थिति में 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

इसी मामले में साक्ष्यों के अभाव में सह-अभियुक्त नवल शर्मा को दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चेक बाउंस करना न केवल एक व्यक्तिगत नुकसान है बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली के विश्वास को भी प्रभावित करता है।

परिवादी पक्ष ने एडवोकेट संजीव पांडेय और एडवोकेट कुलदीप रावत की दमदार पैरवी का आभार जताया है।










