देहरादून। मानसून में जगह-जगह उखड़ी और गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों को लेकर सरकार एक बार फिर जुबानी जमा खर्च पर उतर आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 जिलों के डीएम के साथ वर्चुअल बैठक कर 15 अक्टूबर तक प्रदेश की सभी सड़कों को “गड्ढा मुक्त” करने का फरमान सुना दिया है। लेकिन सवाल ये है कि हर साल की तरह इस बार भी क्या ये सिर्फ कागजी घोषणा बनकर रह जाएगी?
सीएम आवास में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून खत्म होते ही अभियान चलाकर सड़कों को दुरुस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि आपदा या बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों का विवरण जिला स्तर पर तैयार हो और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत शुरू हो। साथ ही “जन-जन के द्वार” कार्यक्रम को भी तेज करने की बात कही गई।
लेकिन बीते कई सालों का अनुभव बताता है कि मानसून के बाद हर बार ऐसी ही घोषणाएं होती हैं, टेंडर निकलते हैं, फाइलें दौड़ती हैं और अक्टूबर-नवंबर आते-आते काम फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। पहाड़ों में भूस्खलन और मैदानों में जलभराव के बाद उखड़ी सड़कें आम जनता के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही और बजट के अभाव के चलते हालात जस के तस हैं।
विपक्ष पहले भी आरोप लगाता रहा है कि सरकार फोटो खिंचवाने और बैठकें करने में व्यस्त है, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। इस बार भी 15 अक्टूबर की डेडलाइन देकर सरकार ने जिम्मेदारी सीधे डीएम और विभागों के सिर मढ़ दी है। देखना होगा कि क्या वाकई इस बार सड़कें समय पर दुरुस्त होंगी या फिर जनता को एक बार फिर टूटी-फूटी सड़कों पर सफर करने को मजबूर होना पड़ेगा।
बैठक में प्रमुख सचिव, कमिश्नर और आईजी स्तर के अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन बड़े-बड़े अफसरों की मौजूदगी के बावजूद सड़कों की हालत में सुधार कब होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।







