देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली और उपभोक्ता शिकायत निस्तारण व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। देहरादून के मोथोरोवाला, विष्णुपुरम, लेन नंबर 1, निकट श्रेष्ठ वेडिंग प्वाइंट निवासी आराधना डबराल के घरेलू बिजली कनेक्शन पर पिछले माह करीब ₹1 लाख 95 हजार का बिल जारी कर दिया गया। एक सामान्य घरेलू उपभोक्ता के लिए इतनी बड़ी राशि का बिल देखकर पूरा परिवार सदमे में आ गया।
गृहिणी आराधना डबराल का कहना है कि बिल में हुई इस भारी गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही उन्होंने विद्युत वितरण खंड, आईएसबीटी में लिखित शिकायत दर्ज कराई और संबंधित अधिकारियों को मौखिक रूप से भी अवगत कराया। लेकिन शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। आरोप है कि अधिकारी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे। इसके बाद मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी उठाया गया, परंतु वहां भी बिना वास्तविक समाधान के शिकायत को निस्तारित बताकर बंद कर दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अगले महीने बिल में सुधार होने के बजाय राशि और बढ़ गई। पहले जहां लगभग ₹1.95 लाख का बिल भेजा गया था, वहीं बाद में करीब ₹2 लाख का बिल थमा दिया गया। इससे पीड़ित परिवार की परेशानी और बढ़ गई है।
आराधना डबराल ने कहा कि उनके घर का सामान्य बिजली बिल इतना कभी नहीं आया। अचानक इतनी बड़ी धनराशि का बिल आने से पूरा परिवार परेशान है। उन्होंने विभाग से उम्मीद की थी कि मीटर और बिल की जांच कर गलती को सुधारा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस संबंध में विद्युत वितरण खंड, आईएसबीटी को पहले ही लिखित शिकायत दी जा चुकी है, फिर भी अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
इस प्रकरण ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन की बिलिंग व्यवस्था, मीटर रीडिंग और शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार की मांग है कि संबंधित अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर मीटर की जांच करें, पिछले बिलों और वर्तमान रीडिंग का मिलान करें और यदि बिलिंग में त्रुटि हुई है तो उसे तुरंत ठीक कर वास्तविक खपत के आधार पर सही बिल जारी किया जाए।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था में शिकायतों को केवल कागजी खानापूर्ति कर बंद न किया जाए, बल्कि जमीनी समाधान के बाद ही निस्तारण माना जाए।
पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वह उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के साथ उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध वैधानिक विकल्पों का सहारा लेगा।







