देहरादून। सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में कथित दबंगई और मारपीट के मामलों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने कुख्यात बिल्डर पुनीत अग्रवाल को उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम-1970 के तहत छह माह के लिए देहरादून जनपद से जिला बदर कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपी को “गुंडा” घोषित किया। आदेश के अनुसार पुनीत अग्रवाल अगले छह माह तक बिना अनुमति देहरादून जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मामले की शुरुआत एटीएस कॉलोनी निवासी और डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा समेत अन्य निवासियों द्वारा 25 अप्रैल को जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र से हुई। आरोप लगाया गया कि 13 अप्रैल को बिल्डर ने डीआरडीओ में तैनात वैज्ञानिक और उनके परिवार के साथ मारपीट की। घटना में वैज्ञानिक का कान का पर्दा फट गया था। महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्रता और गाली-गलौज करने के भी आरोप लगाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच में सामने आया कि आरोपी के व्यवहार से क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था। थाना रायपुर में दर्ज मुकदमों, वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों की शिकायतों को भी न्यायालय ने गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी की गतिविधियां समाज के लिए खतरा बन चुकी हैं। वहीं बचाव पक्ष ने मामले को आपसी रंजिश और सिविल विवाद बताया, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को आदतन अपराधी माना। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद की सीमा से बाहर भेजा जाए।बताया गया कि इससे पहले भी दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में जिला प्रशासन ने पुनीत अग्रवाल का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर हथियार जब्त किया था। आरोपी के खिलाफ मारपीट, धमकी, गाली-गलौज, अवैध कब्जा और उत्पीड़न समेत विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने कहा कि महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और आमजन की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।








