रुद्रप्रयाग। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के पर्वतीय कृषि महाविद्यालय चिरबटिया में आयोजित दो दिवसीय किसान मेला एवं प्रदर्शनी के पहले दिन किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का काम सिर्फ शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं है बल्कि वैज्ञानिक तकनीकों को खेत तक पहुंचाना भी हमारा उद्देश्य है। स्थानीय संसाधनों जैसे फल, सब्जी उत्पादन, उद्यानिकी और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देकर ही पर्वतीय कृषि को मजबूत और पलायन को रोका जा सकता है। विश्वविद्यालय किसानों की समस्याओं को समझकर लगातार शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है।

मेले में प्रोफेसर डॉ. महावीर सिंह नेगी ने अपने संबोधन में कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां खेती के लिए अनुकूल हैं और यहां कृषि तथा उद्यानिकी में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। अगर किसान अपने पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को जोड़ लें तो उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। वहीं प्रगतिशील किसान संतोषी नेगी ने मंच से कहा कि पहाड़ की महिलाओं और किसानों के पास खेती का पारंपरिक अनुभव और मेहनत करने की क्षमता दोनों है, बस उन्हें समय पर प्रशिक्षण, अच्छी गुणवत्ता के पौधे और बाजार की सुविधा मिल जाए तो बेहतर परिणाम आएंगे। उन्होंने कहा कि पहाड़ की महिला शक्ति को अगर सही मार्गदर्शन मिले तो वह कृषि में क्रांति ला सकती है।
किसान मेले में कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद भी हुआ जहां आधुनिक तकनीकों, सरकारी योजनाओं, जैविक खेती और मशरूम उत्पादन की जानकारी दी गई। इस अवसर पर भरसार महाविद्यालय के डीन ए अरुणाचलम, लुठियाग की ग्राम प्रधान सुदीपा मेहरा, राज्य आंदोलनकारी सुरेंद्र सकलानी, हयात सिंह राणा, सतीश भट्ट सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में काश्तकार मौजूद रहे।










