पौड़ी। पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ ग्राफिक्स वायरल हो रहे हैं, जिसमें गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की सांसद निधि का खर्च शून्य दिखाया गया है। ग्राफिक्स में सोर्स RTI बताया गया है। पर जब उस RTI के कागज को देखा गया तो हकीकत कुछ और ही निकली।
RTI में क्या लिखा है?
सूचना लोक सूचना अधिकारी, उपायुक्त (प्रशासन) ग्राम्य विकास, पौड़ी द्वारा दी गई है। इसमें बताया गया है कि वर्ष 2024, 2025, 2026 में गढ़वाल सांसद द्वारा कुल 9 प्रस्ताव दिए गए, जिसमें 7 स्वीकृत हुए, 3 में कार्य प्रगति पर है और 3 पूर्ण हो चुके हैं।

पर इसी सूचना में पूर्ण हुए 3 कार्यों के सामने व्यय शून्य लिखा गया है।

यहाँ पहला सवाल : अगर 3 कार्य पूर्ण हुए हैं तो उन पर खर्च तो हुआ होगा। खर्च शून्य कैसे हो सकता है?
इसी RTI में अल्मोड़ा सांसद के भी 3 कार्य पूर्ण दिखाए गए हैं और उनके सामने व्यय का आंकड़ा लिखा गया है। तो गढ़वाल सांसद के मामलों में ही खर्च शून्य क्यों?

सबसे बड़ा झोल : ये आंकड़ा सिर्फ पौड़ी जिले का है, गढ़वाल लोकसभा एक बड़ा क्षेत्र है। इसमें पौड़ी जनपद के अलावा टिहरी के 2 विधानसभा, चमोली के 3, रुद्रप्रयाग के 2 और नैनीताल का 1 विधानसभा क्षेत्र आता है।

जबकि यह RTI सिर्फ पौड़ी जिले के विकास कार्यों की है। सांसद निधि के प्रस्ताव सभी जिलों में जाते हैं, पर इस RTI में बाकी 4 जिलों का कोई जिक्र ही नहीं है। सिर्फ पौड़ी के 9 प्रस्तावों को आधार बनाकर पूरे गढ़वाल का खर्च शून्य बताना अधूरी जानकारी है।

MPLADS कैसे काम करती है?
नए सांसदों को पहली किश्त 2024 के अंत में मिली थी। काम की प्रक्रिया लंबी होती है – प्रस्ताव सांसद देता है, जिला प्रशासन स्वीकृत करता है, कार्यदायी संस्था PWD या अन्य विभाग काम करता है, उसके बाद बिल पास होता है और पोर्टल पर खर्च दिखता है।

इसी कारण उत्तराखंड के सभी नए लोकसभा सांसदों का खर्च प्रतिशत अभी कम है। जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह का खर्च 28% (4.08 करोड़), नैनीताल के अजय भट्ट का 12% (1.79 करोड़), हरिद्वार के त्रिवेंद्र सिंह रावत का 10% (1.49 करोड़) है। अल्मोड़ा और गढ़वाल में तकनीकी कारणों से पोर्टल पर खर्च कम या शून्य दिख रहा है।
क्या यह छवि धूमिल करने की कोशिश है
जब एक ही RTI में दो सांसदों के लिए दो अलग-अलग पैमाने अपनाए जाएं – एक के पूर्ण कार्यों पर व्यय लिखा जाए और दूसरे के पूर्ण कार्यों पर शून्य – तो यह लापरवाही नहीं तो और क्या है?
इस अधूरी सूचना के आधार पर बने ग्राफिक्स का उपयोग सांसद की छवि को धूमिल करने के लिए किया जा रहा है।
मांग क्या है?
1. ग्राम्य विकास विभाग, पौड़ी को स्पष्ट करना चाहिए कि पूर्ण कार्यों पर व्यय शून्य कैसे है।
2. चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और नैनीताल जनपदों की भी RTI सार्वजनिक होनी चाहिए ताकि गढ़वाल लोकसभा का पूरा आंकड़ा सामने आए।
3. http://mplads.gov.in पर सांसद-वार वास्तविक खर्च की जानकारी समय पर अपडेट होनी चाहिए।
सांसद निधि जनता का पैसा है, इसका हिसाब जनता को मिलना चाहिए, पर हिसाब पूरा होना चाहिए, आधा-अधूरा नहीं।











