नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी देहरादून को दो महीने के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
Writ Petition Service Single No. 2475 of 2026 में तिलक राम जोशी और अन्य ने राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर की थी। 25 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ में इस पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सूर्यकांत मैथानी और सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल के.एन. जोशी पेश हुए।
याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता 1995-96 से राजस्व विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। याचिकाकर्ता नंबर 1 को 2002 में नियमित किया गया, जबकि नंबर 2 और 3 को कट-ऑफ डेट 01.10.2005 के बाद नियमित किया गया।
राज्य सरकार ने 7 नवंबर 2023 को अधिसूचना संख्या 27057/2023 जारी कर कट-ऑफ डेट के बाद नियुक्त या नियमित हुए सरकारी सेवकों से पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने के लिए वन टाइम विकल्प मांगा था। इसी के तहत याचिकाकर्ताओं ने अपने विकल्प पत्र एसडीएम चकराता और कालसी को सौंपे, जिन्हें 30 जनवरी 2024 को जिलाधिकारी देहरादून को भेज दिया गया था।
आरोप है कि जिलाधिकारी स्तर पर इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने 27 मई 2026 को जिलाधिकारी को प्रत्यावेदन दिया, जो अभी भी लंबित है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कोर्ट से कहा कि यदि जिलाधिकारी को समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दे दिया जाए तो न्याय की पूर्ति हो जाएगी। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका का निस्तारण करते हुए आदेश दिया कि जिलाधिकारी देहरादून याचिकाकर्ताओं के 27 मई 2026 के प्रत्यावेदन पर इस आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो महीने के भीतर सकारण और स्पष्ट आदेश पारित करें।







