नई दिल्ली। मोदी सरकार के 12 साल के इतिहास में पहली बार सड़क का दबाव इतना भारी पड़ा कि एक कैबिनेट मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार देर रात 2 पेज और 575 शब्दों की चिट्ठी लिखकर पद से इस्तीफा दे दिया।
‘उत्तराखंड डिटेल्स’ के पास मौजूद चिट्ठी में प्रधान ने साफ लिखा है कि युवाओं को “भ्रमित” किया गया। इसी एक लाइन ने सरकार की नींद उड़ा दी। पिछले 10 दिनों से छात्र संगठन और विपक्ष इसी मुद्दे पर दिल्ली की सड़कों पर थे। आखिरकार सत्ता को झुकना पड़ा।
इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर रणभूमि बन गया। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने माइक थामते ही कहा – “ये कहते थे यहां इस्तीफे नहीं होते। आज देख लो, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” इस एक बयान पर पूरा मैदान “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा।
2014 से अब तक का ये पहला मौका है जब किसी मंत्री को जनांदोलन के कारण कुर्सी छोड़नी पड़ी। 2018 में एमजे अकबर ने ‘मी टू’ के चलते इस्तीफा दिया था, लेकिन वो निजी आरोप थे। प्रधान का इस्तीफा सीधे जनता के गुस्से से जुड़ा है।
दिल्ली के सियासी गलियारों में अब ये चर्चा तेज है कि इस्तीफे के बाद सरकार बैकफुट पर है। सूत्र बताते हैं कि पीएम आवास पर देर रात बैठक हुई और युवा वर्ग को मनाने के लिए नए पैकेज पर मंथन शुरू हो गया है। वहीं विपक्ष ने इसे “जनता की जीत” बताकर 2026 के चुनाव का मुद्दा बना दिया है।
अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है – “ये सिर्फ शुरुआत है। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, जंतर-मंतर खाली नहीं होगा।”








