देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को विधिवत समाप्त करने का फैसला लिया है। अब इसके स्थान पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण सभी 452 पंजीकृत मदरसों समेत अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा।
राज्य सरकार ने अगस्त 2025 में विधानसभा में अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 पारित किया था। 6 अक्टूबर 2025 को राजभवन से विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद प्राधिकरण का गठन किया गया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी को बनाया गया है। इसमें मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के प्रतिष्ठित विद्वानों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
1 जुलाई 2026 से सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेना अनिवार्य होगा। पहली से आठवीं तक के मदरसों की संबद्धता प्रक्रिया की निगरानी मुख्य शिक्षा अधिकारी करेंगे। नौवीं से 12वीं तक के मदरसों को 30 जून तक उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी। इसी तारीख से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा भी लागू हो जाएगा। मदरसों में अब विज्ञान, गणित और कंप्यूटर जैसे आधुनिक विषयों की पढ़ाई पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह फैसला शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम है। नया प्राधिकरण अल्पसंख्यक बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा की रूपरेखा तय करेगा और पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देगा। इससे शिक्षा में पारदर्शिता आएगी और छात्र मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से बेहतर तरीके से जुड़ पाएंगे। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि यह सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक सुधार है। प्राधिकरण संस्थानों को कानूनी संरक्षण देगा और शिक्षा की गुणवत्ता व सामाजिक सौहार्द को मजबूत करेगा।
प्रदेश में 452 पंजीकृत मदरसों में से 30 मदरसे विभिन्न कारणों से बंद पड़े हैं। प्राधिकरण बंद और विवादित मदरसों के लिए रिसीवर नियुक्त करेगा। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर प्रशासन दस्तावेजों और भूमि अभिलेखों की जांच कराएगा। अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण प्रत्येक आवेदन की समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर संस्थानों का भौतिक निरीक्षण भी कराया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर सुनवाई के बाद मान्यता निरस्त करने का प्रावधान रखा गया है।
विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर ढाकाटे ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड निष्क्रिय हो जाएगा, लेकिन मदरसों में शिक्षा का काम चलता रहेगा। मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड में रजिस्टर्ड होकर मानकों को पूरा करना होगा। सरकार का मकसद अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है।






