कर्णप्रयाग। कर्णप्रयाग-गोचर में हुई हालिया घटना को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है। तीन दिन तक चले बवाल के बाद आरोपियों की सम्मान के साथ विदाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहरी तत्वों ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को गालियां दीं, बल्कि पुलिस पर पथराव किया और सेवादारों को बंधक तक बना लिया। तीन दिन तक शासन और प्रशासन की नाक में दम करने के बाद जब कार्रवाई की उम्मीद थी, तब नतीजा सबको चौंकाने वाला रहा।
लोगों का सवाल है कि क्या इन हुड़दंगियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी? क्या यह पूरी घटना प्रदेश की कानून व्यवस्था पर तमाचा नहीं है?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आम पहाड़ी अगर छोटी सी गलती कर दे तो तुरंत चालान और मुकदमा हो जाता है। लेकिन खुलेआम कानून तोड़ने, पुलिस पर हमला करने वालों को सम्मान के साथ छोड़ दिया जाता है।
जनता पूछ रही है कि क्या नियम और कानून सिर्फ उत्तराखंड के आम जनमानस के लिए हैं? लोगों का कहना है कि अगर देवभूमि की शांति भंग करने वालों पर अभी सख्ती नहीं हुई तो कल कोई भी आकर यहां कानून को चुनौती दे सकता है।
इस घटना के बाद सरकार और प्रशासन से जवाब की मांग तेज हो गई है।









