रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड सरकार द्वारा निहंग सिखों की गई विदाई अब विवाद का कारण बन गई है। राज्य सरकार ने हाल ही में रुद्रप्रयाग में निहंग सिखों को पारंपरिक सम्मान के साथ विदा किया था, लेकिन इस विदाई के तरीके और समय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार ने निहंग सिखों की विदाई को अनावश्यक रूप से प्रचारित किया और इसमें नियमों की अनदेखी की गई। उनका आरोप है कि जिस अंदाज में विदाई दी गई उससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है।
वहीं सरकार के समर्थकों का कहना है कि निहंग सिख उत्तराखंड में तीर्थयात्रा पर आए थे और परंपरा के अनुसार उनका सम्मान करना राज्य की जिम्मेदारी थी। सरकार का पक्ष है कि विदाई पूरी तरह सम्मानजनक और शांतिपूर्ण तरीके से हुई, इसमें किसी भी तरह की विवादित बात नहीं है।
रुद्रप्रयाग प्रशासन ने सफाई दी है कि विदाई के दौरान कानून-व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया था। निहंग सिखों को भी प्रशासन की तरफ से सहयोग मिला और वह बिना किसी परेशानी के वापस लौट गए।
अब यह मामला राजनीतिक रंग भी ले रहा है। विपक्षी दल इस मुद्दे को उठाकर सरकार से सफाई मांग रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को बताना चाहिए कि विदाई के लिए किन नियमों का पालन किया गया और सरकारी खर्च कितना हुआ।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को देखते हुए रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद ही तय होगा कि विदाई में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।









