रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में शनिवार शाम से शुरू हुआ विवाद रविवार शाम करीब 27 घंटे बाद कुछ हद तक शांत हो गया है।
जिला प्रशासन और निहंगों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद बंधक बनाए गए सेवादार नवतेज सिंह को रविवार शाम रिहा कर दिया गया। एक निहंग अकाल सिंह भी छत से नीचे उतर आए। अभी भी छह निहंग गुरुद्वारे के अंदर मौजूद हैं, उनसे प्रशासन की बातचीत जारी है। बातचीत के बाद गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं की आवाजाही और अरदास फिर से शुरू हो गई है।
16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में हेमकुंड साहिब से लौट रहे निहंग सिखों और स्थानीय लोगों में वाहन पार्किंग को लेकर झगड़ा हुआ था। उसमें तलवार से हमले में चार लोग घायल हुए थे। पुलिस ने पंजाब के मोहाली से आए चार निहंगों को गिरफ्तार किया था।
इसी घटना के विरोध में शनिवार दोपहर करीब 4 बजे 6-7 निहंग सिख नगरासू गुरुद्वारा पहुंचे। उन्होंने 50-60 कमरों की मांग की। मांग पूरी न होने पर तोड़फोड़ की, पानी और सोलर सिस्टम बंद कर दिया और गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर कब्जा कर लिया। एक 60 साल के श्रद्धालु और सेवादार को बंधक बना लिया था। एक युवक को शनिवार रात ही छोड़ दिया गया था।
रुद्रप्रयाग एसपी नीहारिका तोमर ने फोन पर निहंगों से बात की और पंजाब सुरक्षित वापसी का भरोसा दिया। मौके पर पुलिस, आईटीबीपी, एटीएस और पीएसी तैनात की गई। कर्णप्रयाग में 27 जून तक धारा 163 लागू कर दी गई है और अफवाह फैलाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। राज्य सरकार ने कर्णप्रयाग प्रकरण की जांच के लिए गढ़वाल आईजी को आदेश दिए हैं।
गुरुद्वारा प्रबंधक बेहंत सिंह के मुताबिक निहंग किसी मान्यता प्राप्त सिख संगठन से जुड़े नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि हेमकुंड साहिब और चारधाम यात्रा सामान्य चल रही है, रास्ते खुले हैं। डीएम विशाल मिश्रा ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।









